झांसी। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत करीब डेढ साल पहले जनपद के बीस गांव चयनित हुए, लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी इन गांवों की तकदीर नहीं बदली। चयनित गांवों की दशा अभी भी जस की तस है।
ग्राम स्तर से विकास की शुरूआत के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना आरंभ की। इसके जरिए शासन की मंशा गांवों को विकसित करने की थी, ताकि शहरों की ओर हो रहे पलायन को रोका जा सके। इसके लिए गांववार आबादी के आंकड़े जुटाए गए और जिले में दिसंबर 2019 तक बीस गांव चुने गए। इन गांवों में सड़क, बिजली व पानी से लेकर रोजगार आदि की व्यवस्था की जानी थी, ताकि इनको संतृप्त किया जा सके। शुरूआत में प्रत्येक गांव के लिए पांच करोड़ रुपये भी तय कर दिए गए। इसके बाद केंद्रीय टीम ने चयनित गांवों का दौरा किया, लेकिन उसके बाद से काम ठप पड़ गया।
शुरू में अधिकारियों की लापरवाही से काम ने रफ्तार नहीं पकड़ी। लेट लतीफी के बाद जब प्रस्ताव भेजा गया, तब पर्याप्त बजट नहीं होने से काम शुरू नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी चयनित गांवों में काम शुरू नहीं हो सके हैं। वहीं, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) का कहना है बजट नहीं मिलने से समय पर काम शुरू कराने में परेशानी आई।
चयनित गांव परिवार की संख्या
गढ़मऊ 474
एरवइ 945
पहाड़ीबुजुर्ग 528
बंगरी 735
स्यावरी 548
धुरवई 800
निपान 432
बसारी 306
मोती कटरा 493
दुरखुरू 800
हरदुआ 350
लवेहरा 445
लुहरगांव रानीपुर 702
नवादा 250
चकरा 856
तिलैरा 553
खरकामाफ 405
रौनी 518
जौरा 548
बुढ़ावली 647