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इंतजार खत्म, सीपरी ओवरब्रिज का सितंबर से शुरू हो जाएगा अधूरा काम

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कई वर्षों से अधर में लटका सीपरी बाजार का ओवरब्रिज के नीचे बड़े-बड़े गढ़्डे हो गए हैं, इनमे बरसात का
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झांसी। सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम के सितंबर से शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। कंपनी ने 50 मीटर के छह गार्डर बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है। यह गार्डर इसी महीने से आना शुरू हो जाएंगे। जबकि 36 मीटर के छह गार्डर पहले से रखे हैं। ऐसी स्थिति में काम शुरू होने पर उसमें दोबारा ब्रेक नहीं लगेगा।
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सीपरी बाजार ओवरब्रिज का निर्माण शहर के लिए एक समस्या बन गया है। एक के बाद एक व्यवधानों के चलते छह साल में भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। अधूरा काम पूरा कराने की जिम्मेदारी नई कंपनी के पास आने के बाद उम्मीद जगी थी कि इस साल ओवरब्रिज से गाड़ियां फर्राटे भरने लगेेंगी, लेकिन कोरोना महामारी ने काम पर फिर ब्रेक लगा दिया। दरअसल, अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। 36 मीटर के गार्डर आ गए हैं। नई कंपनी को दिल्ली स्थित अपनी फैक्ट्री में 50 मीटर के गार्डर बनाने थे, जो लगभग बनकर तैयार हो गए हैं। निर्माण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अगले हफ्ते से एक- एक 50 मीटर के गार्डरों का आना शुरू हो जाएगा। सितंबर के शुरूआत में हर हाल में काम शुरू हो जाएगा।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम को पूरा करने के लिए नया टेंडर गैलविनो कंपनी को दिया गया है। कंपनी को अधूरा काम 10.50 करोड़ रुपये में पूरा करना है। कंपनी खुद अपने कारखाने में गार्डर बना रही है।
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ये काम बाकी
अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। 36 मीटर के गार्डर आ गए हैं। 50 मीटर के गार्डर आने के बाद एक साथ ही काम शुरू होगा। गार्डर रखने के बाद सड़क बनाने का काम होगा। सितंबर में अगर काम शुरू हो गया तो अगले चार से छह महीने में काम पूरा हो जाएगा।
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कभी नहीं सोचा था कि ओवरब्रिज को बनने में इतने साल लग जाएंगे। पिछले छह सालों से समस्या का अंत नहीं हो रहा है।
नितिन चंगानी।
पुल के एक बगल से सड़क न बनने के कारण बारिश से सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ हो जाता है, जिससे बहुत परेशानी होती है।
ध्रुव अग्रवाल।
सीपरी बाजार पुल के पास जगह- जगह अतिक्रमण के कारण ऑटो चालक बेतरतीब खड़े रहते हैं। पुलिस उनको इधर- उधर ही करती रहती है।
परमजीत सिंह भुसारी।
कोरोना महामारी के दौरान ट्रेनों का संचालन थमा रहा। ऐसे में अगर रेलवे अधूरा काम कर लेता तो किसी को आगे होने वाली परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
मनीष कुमार साहू।
इस पुल के निर्माण ने मेरा पूरा व्यापार चौपट कर दिया है। जिला प्रशासन और नगर निगम भी लोगों की दिक्कतों को नहीं समझ रहा है।
रामगोपाल अग्रवाल।
अभी एक तरफ जो नाला बना है उसे कई जगह मोड़ दिया गया है। तेज बारिश होने पर नाले का कोई लाभ मिलने वाला नहीं है।
अजहर।
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