झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मात्स्यिकी महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में देश के मत्स्य विशेषज्ञों ने कहा कि यदि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक मत्स्य पालन को अपनाया जाए तो भारत की ब्लू इकोनॉमी को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व किसानों की आय भी बढ़ेगी।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक मत्स्य पालन ही सतत् उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। डॉ. देविका पिल्लई (आईसीएआर, नई दिल्ली) और डॉ. बी. मनोजकुमार (पूर्व कुलसचिव, केयूएफओएस) ने कहा कि मत्स्य पालन आज केवल रोजगार का साधन के साथ देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने वाला रणनीतिक क्षेत्र बन चुका है। कार्यक्रम में भुखमरी एवं कुपोषण को कम करने तथा ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने में मत्स्य किसान का योगदान विषय पर नारा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। समारोह में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रगतिशील मत्स्य किसान मिथुन केवट को सम्मानित किया गया और नारा लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।