मानक के विरुद्घ चल रहे स्कूली वाहनों पर कार्रवाई बंद हो गई है। इस कारण इनकी मनमानी फिर शुरू हो गई है। स्कूली ऑटो अब फिर क्षमता से अधिक बच्चों को बैठा रहे हैं।
19 जनवरी को एटा में स्कूल बस दुर्घटना में 12 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद हरकत में आए यातायात और परिवहन विभाग ने दो दिन अभियान चलाकर 77 स्कूली वाहनों का चालान किया था। दो दिन कार्रवाई होेने के बाद अभियान को बंद कर दिया गया। इस कारण ऑटो वाले फिर पुराने ढर्रे पर आ गए हैं।
इन मानकों और नियमों का उल्लंघन
- स्कूली बस का रंग पीला होना चाहिये।
- आगे और पीछे स्कूली वाहन लिखा होना जरूरी है।
- वाहन में फस्ट एड बॉक्स (चिकित्सा उपकरण) जरूरी है।
- खिड़कियों में जाली और अग्निशमन यंत्र रखना जरूरी है।
- बसों में स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- वाहन चालक को पांच साल वाहन चलाने का अनुभव हो।
- वाहनों का इस्तेमाल सिर्फ बच्चों को लाने और पहुंचाने में हो।
- स्कूली वाहनों में जीपीएस सिस्टम होना जरूरी है।
स्कूली ऑटो के लिए जरूरी
- बच्चों की सुरक्षा के लिए दरवाजे के दोनाें ओर जाली हो।
- छह से अधिक बच्चों को नहीं बैठा सकते।
- साल में एक बार फिटनेस का प्रमाणपत्र लेना जरूरी।
- ड्राइवर पांच साल ऑटो चलाने का अनुभव हो।
-स्पीड 15 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिये।
निगाह रखता हूं
स्कूल की ओर से छात्रों को वाहन मुहैया नहीं कराया जाता है। ऑटो चालकों को हिदायत देता रहता हूं कि क्षमता से अधिक बच्चे न बैठाएं और नियमों का पालन करें। अभिभावकों को भी चिंता करनी चाहिए कि वे ओवरलोड ऑटो में बच्चों को न भेजें।
- उस्मान खान, प्रिंसिपल- हाफिज सिद्दीकी नेशनल इंटर कॉलेज
कार्रवाई होगी
चुनाव में व्यस्तता के कारण लगातार कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अभियान जारी रहेगा। समय मिलने पर फिर से कार्रवाई होगी। नियमों और मानकों का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा।
सिद्घार्थ यादव, एआरटीओ प्रवर्तन