जलसंस्थान में घोटाले का एक और जिन्न चिराग से बाहर निकल आया है। इसमें अफसरों ने मोटर साइकिलों और कारों के नंबर पर ट्रैक्टर-टैंकर चला दिए हैं। सूत्रों की माने तो वर्ष 2016, 17 और 18 को मिलाकर 46 ऐसे संदिग्ध वाहनों के नंबर पाए गए हैं, जिनमें या ट्रैक्टरों का व्यावसायिक पंजीकरण नहीं कराया या फिर वो मोटरसाइकिल या कार के नंबर हैं। वहीं, अफसरों ने कागजों में ही हेरफेर कर भुगतान कर दिया। आरटीओ को इसकी भनक लगी तो उसमें राजस्व की हानि देखते हुए टैक्स जमा करने की बात कही। तब इस घोटाले से पर्दाफाश हो सका है।
वहीं, जल संस्थान अफसरों के मुताबिक हर साल गर्मियों में संकटग्रस्त क्षेत्रों में टैंकर चलाए जाते हैं, इनमें ठेकेदार जो भी वाहन लगाते हैं, उनके नंबर रिकॉर्ड में दर्ज किए जाते हैं, इस प्रकरण में लिपिक द्वारा त्रुटिवश गलती की गई है। जिसको आरटीओ कार्यालय में भेजकर वाहनों के नंबरों में संशोधन करने की बात कही गई है। गौरतलब हो कि जलसंस्थान में अभी बीते दिनों 500 करोड़ के घोटाले की जांच की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब टैंकरों का खेल उजागर हो गया है। मामला उजागर होने के बाद अब ये जांच का विषय बन गया है कि जनता को पानी पिलाने के नाम पर कितना खेल अफसरों द्वारा किया गया है।
जलसंस्थान जिन वाहनों को व्यावसायिक में उपयोग कर रहा था। उन वाहनों की जांच की गई है। जिसमेें वाहन व्यावसायिक की जगह निजी व कृषि कार्य वाले पाए गए हैं। इसके साथ ही कुछ कार व बाइक के नंबर मिले हैं। इस पर जलसंस्थान के अधिकारियों को नोटिस भेजकर टैक्स जमा करने की कार्रवाई की जाएगी।
- प्रभात पांडेय, आरटीओ प्रवर्तन
सूची में लिपिकों द्वारा गलत नंबर दर्ज करा दिए गए थे। ये सूचना मेरे पास आई तो विभाग में अभिलेखों की जांच कराई गई है। जिनमें लिपिक द्वारा त्रुटिवश गलत नंबर अंकित कर दिए गए थे। दोबारा आरटीओ को सूची भेज दी गई है। जिससे सही नंबर अंकित करा दिए जाएंगे।
- कुलदीप सिंह महाप्रबंधक जलसंस्थान