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झांसी में थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर खरीद में हुआ गोलमाल

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झांसी। कोरोना काल में कहीं अधिक कीमतों पर ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर व अन्य चिकित्सकीय उपकरण खरीदे जाने के मामले पर अब तंत्र की नींद टूटी है। झांसी में भी बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा हुआ। एक ओर केंद्र व प्रदेश सरकार चीन में निर्मित उत्पादों के सरकारी दफ्तरों में उपयोग पर रोक लगा रही थी। वहीं, सरकारी अमला झांसी में धड़ल्ले से चीन में निर्मित चिकित्सकीय उपकरण खरीदता चला जा रहा था। इनकी कीमत भी कई गुना अदा की गई। दोयम दर्जे के ये उपकरण या तो गलत रिपोर्ट दे रहे थे या पूरी तरह खराब निकले। इसका खामियाजा झांसी में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण और इस कारण होने वाली मौतें के रूप में सामने आता गया। चुनौती अभी भी बढ़ी हुई हैं।
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अमर उजाला लगातार इस घपले को उजागर करता रहा। 22 जुलाई के अंक में ‘कोरोना बचाव की आड़ में लाखों का घपला’ के जरिये खुलासा किया गया था। इसके बाद ग्राम पंचायतों द्वारा की गई खरीद के भुगतान पर रोक लगाते हुए घोटाले की जांच शुरू कर दी गई थी। इसमें दोषियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। आम आदमी पार्टी के सांसद राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी झांसी में हुए इस घोटाले को उठाया था। सरकार को घेरते हुए उन्होंने हाईकोर्ट के जज की निगरानी में एसआईटी से जांच की मांग की थी।
कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने हर ग्राम पंचायतों को चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए थे। किट में एक पल्स ऑक्सीमीटर, एक इंफ्रारेड थर्मामीटर, 500 पीस थ्री लेयर मास्क, सौ सर्जिकल ग्लव्स, पांच लीटर सैनिटाइजर समेत फेस शील्ड शामिल थी। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार शासनादेश जारी होते ही मजबूत पकड़ रखने वाली एजेंसी ने घुसपैठ शुरू कर दी। शासनादेश के उलट केंद्रीय खरीद की तैयारी शुरू हो गई लेकिन मामले की भनक मंडल के एक आला अफसर को लग गई। इस वजह से रास्ता बदलकर आखिरकार इसकी खरीद ब्लॉक स्तर पर कराई गई थी।
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नहीं कराया गया था टेंडर
74 लाख के इन चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद के लिए कोई भी टेंडर नहीं कराया गया। टेंडर न होने से मनमाने तरीके से उपकरणों के दाम तय किए गए। 800 का ऑक्सीमीटर चार हजार और 1800 में मिलने वाला थर्मामीटर साढ़े चार हजार रुपये खरीदा गया। अमर उजाला द्वारा इस घोटाले का खुलासा किए जाने के बाद जांच शुरू करते हुए भुगतान पर रोक लगा दी गई।
चाइनीज उपकरण खरीदे
एक थर्मल स्कैनर 3500-5000 रुपये तक खरीदे गए, जबकि ब्रांडेड थर्मल स्कैनर अधिकतम दो हजार रुपये में बाजार में मौजूद हैं। खास बात ये है कि खरीदे गए थर्मल स्कैनर चाइनीज हैं। इसी तरह, ऑक्सीमीटर बाजार की कीमत से ढाई गुना अधिक दाम पर खरीदे गए। यह भी ब्रांडेड नहीं हैं। एक थ्री प्लाई मास्क लगभग 720 रुपये में खरीदे गए। ग्लव्स और फेस शील्ड की भी बाजार से ऊंचे दामों पर खरीद की गई। इसी तरह, एक किट 15 हजार रुपये से अधिक कीमत में खरीदी गई। जबकि, इसकी कीमत सात हजार से अधिक नहीं बताई जा रही है। खरीद के बाद बिल भी प्रधान और सचिवों के नाम से ही बनवाए गए। कई प्रधान तो राजी हो गए लेकिन कुछ ने धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध कर दिया। कई सचिव भी इस तरह की खरीद से संतुष्ट नहीं हैं।
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