पानी बचाना जब तक आदत में शामिल नहीं होगा, तब तक जल संचय करना बेमानी है। जल संवर्धन के जो भी कार्य किए गए, उनको लोगों से साझा किया जाए। ताकि, जागरूकता से ही लोगों को जल संचय के लिए प्रेरित किया जा सके। यह बात शुक्रवार को पैरा मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के संयुक्त सचिव नीतिश्वर कुमार ने कही।
उन्होंने ललितपुर में जल सहेलियों के कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जल सहेलियों की फिल्म बनाकर उसे दूसरों को दिखाया जाए। इससे अन्य क्षेत्रों की महिलाएं भी आगे आएंगी। देश भर में लगभग 617 जिले ऐसे हैं, जहां जलसंकट निकट है। इन जिलों के लगभग एक हजार ब्लाक में परिवर्तन लाना होगा, ताकि जल दोहन न हो सके। 617 जिलों में सबसे पहली कार्यशाला झांसी में हुई। मानसिकता और दृष्टिकोण में बदलाव के साथ ही आचार-विचार में परिवर्तन लाने से ही जल दोहन रोकने व जलसंचय का कार्य हो सकता है।
मंडलायुक्त कुमुदलता श्रीवास्तव ने मंडल की भौगोलिक संरचना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यहां पानी की विकट समस्या है, परंतु 2018 में अच्छी वर्षा होने से सभी नदियां, तालाब व बांध पूर्ण क्षमता के साथ भर गए है। ड्रिप इरीगेशन व स्प्रिंकलर के माध्य से सिंचाई काफी लाभदायक है। जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने इस बार पर्याप्त बारिश होने से पानी की शिकायतें कम आ रही है। बुंदेलखंड में जल संचय के लिए जागरूकता के अभाव से समस्या अधिक है। यहां पानी पंचायत प्रत्येक गांव में प्रभावशाली ढंग से कार्य कर सकती है। उन्होंने क्षेत्र में ड्रिप व स्प्रिंकलर को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।
गांव सैयर के ग्राम प्रधान कामता प्रसाद ने कहा कि क्षेत्र में मिट्टी हार्ड है, जिससे खुदाई नहीं हो पाती है। सुझाव दिया कि यदि मशीन से मिट्टी खोदने की अनुमति मिल जाए तो कार्य बेहतर होगा। परमार्थ सेवा संस्थान से जल सहेजी पुष्पा और रामवती ने पानी की समस्या को दूर करने के लिए कुआं साफ करने की बात कही। इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय तीन के छात्र- छात्राओं ने पानी बचाओ- जीवन बचाओ पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। संयोजन डा. नीति शास्त्री ने किया। कार्यशाला का संचालन वीरेंद्र सिंह व आभार निदेशक गिरिराज गोयल ने किया।