ज्ञानस्थली पब्लिक स्कूल में चल रहे प्रदेश स्तरीय अंडर- 15 वर्ष शतरंज प्रतियोगिता में गाजियाबाद, झांसी और आगरा के खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया। मंगलवार को रिया मिश्रा, तान्या वर्मा, आयुष केसरी, काव्य अग्रवाल ने अपने - अपने मुकाबले जीते।
प्रतियोगिता में अब तक शानदार प्रदर्शन करते आ रहे गाजियाबाद के काव्य अग्रवाल ने गोरखपुर के राशिश श्रीवास्तव को, मैनपुरी के ओम चौहान ने इलाहाबाद के इशान मालवीय को, आगरा के आदित्य प्रताप सिंह ने लखनऊ के आदित्य पंत को, लखनऊ के अग्रहरि सत्यम ने वाराणसी के कुणाल किशोर को, आगरा के ही पार्थ भटनागर ने वाराणसी के शुभम को, झांसी के आयुष केसरी ने शामली के रुद्र को हराया। बालिका वर्ग में आगरा की सारा प्रकाश ने अपने जिले की ही वाणिका को, बलिया की रिया मिश्रा ने वाराणसी की शांभवी श्रीवास्तव को, झांसी की मान्या राजपूत ने गाजियाबाद की अनुष्का भारद्वाज को, कानपुर की तान्या वर्मा ने झांसी की आशी खरे को तथा गोरखपुर की सौम्या सिंह ने झांसी की गार्गी चतुर्वेदी को पराजित किया।
प्रतियोगिता पर्यवेक्षक कविता पटेल, अंपायरों में मनस्वी जैन, विपुल श्रीवास्तव, रोहित केसरिया, उमेश पटेल, शोभा द्विवेदी, अंकिता श्रीवास्तव रहीं। इस अवसर पर कोच दीपक शाक्य, अर्चना गुप्ता, रविंद्र सिंह सोलंकी आदि मौजूद रहे।
पढ़ाई में मददगार है 64 खाने की बिसात
महानगर में प्रदेश स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता चल रही है। इसमें कई जिलों के बच्चे शतरंज की बिसात पर अपना जौहर दिखा रहे हैं। इन बच्चों को कहना है कि शतरंज महज एक खेल नहीं, बल्कि दिमागी कसरत है। एकाग्रता बढ़ाता है, जो पढ़ाई में काफी मददगार साबित होता है।
एकाग्रता में होती है वृद्धि
शतरंज एकाग्रता का खेल है। इसके निरंतर अभ्यास से एकाग्रता में वृद्धि होती है। यह मेमोरी पॉवर भी बढ़ाता है। इससे पढ़ने में बहुत मदद मिलती है।
- सारा प्रकाश, खिलाड़ी आगरा
घर में सभी खेलते हैं शतरंज
घर में परिवार के सभी सदस्य शतरंज खेलते हैं। यही कारण कि किसी के साथ भी इसे खेलने बैठ जाती हूं। दस वर्ष की उम्र से शतरंज खेलना शुरू कर दिया था।
- वणिका, खिलाड़ी आगरा
परीक्षा देने से पहले खेलते हैं शतरंज
अक्सर परीक्षा देने से पहले शतरंज खेलता हूं। इससे तनाव परीक्षा को लेकर नहीं होता है, बल्कि आत्म विश्वास बढ़ाता है और निर्णय लेने की क्षमता पैदा करता है।
- ओम चौहान, खिलाड़ी मैनपुरी
कई दिग्गज दिए हैं इस खेल ने
बुद्धिमानों के इस खेल का आविष्कार हमारे देश में हुआ है और विश्वनाथन आनंद जैसे कई दिग्गज खिलाड़ी हमारे देश ने दिए हैं। गर्व होता है इसे खेल को खेलकर।
- आयुष केसरी, खिलाड़ी झांसी