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औषधीय खेती के लिए सरवां बनेगा मॉडल गांव

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झांसी। औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए बबीना ब्लॉक के सरवां गांव को मॉडल गांव के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। किसानों को औषधीय पौधे रोपने के लिए बीज समेत आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जा रही। अफसरों के मुताबिक इनकी बिक्री के लिए कई जानी-मानी आयुर्वेदिक कंपनियों से संपर्क साधा गया है। कंपनियों के दिलचस्पी लेने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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झांसी में अभी तक एलोवेरा एवं तुलसी की कुछ ब्लॉकों में खेती होती है। इनमें भी किसान तुलसी लगाने में अधिक जोर देते हैं लेकिन, औषधीय पौधों की मांग अधिक होने से धीरे-धीरे किसानों में उत्सुकता बढ़ रही है। उद्यान विभाग ने औषधीय खेती को आगे बढ़ाने के लिए सरवां गांव को खास तौर से चुना है। यहां किसानों को एलोवेरा, मूसली, तुलसी, घृतकुमारी, गिलोय समेत अन्य पौधों के लगाने के तरीके के साथ ही उनको प्रंसस्कृत करने के तौर-तरीके भी समझाए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है इन फसलों की नकदी कीमत मिलने की वजह से किसान भी इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। यहां कुल 500 बीघे में इसकी खेती कराई जाएगी। अगर यहां प्रयोग सफल रहा तब इसे झांसी के दूसरे गांवों में भी बढ़ाया जाएगा। एक फसली सीजन में अधिकतम चार फसल तैयार की जा सकती है। खेतों से ही सीधे इनकी खरीद की व्यवस्था की जा रही है। झांसी स्थित आयुर्वेदिक कंपनी समेत दूसरी बड़ी कंपनियों से इसके बारे में भी बात की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश कंपनियों ने खरीद के लिए सहमति जताई है। ऐसा होने पर किसानों की आय में बढ़ोत्तरी हो सकेगी। उद्यान अधीक्षक भैरम सिंह के मुताबिक गांव के तीस से अधिक किसानों ने इसमें अपनी दिलचस्पी जाहिर की है। उनको इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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