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अस्पतालों की ओपीडी में उमड़ी भीड़, कई बिना इलाज कराए लौटे

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झांसी। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सोमवार से शुरू हो गई। पहले ही दिन मरीजों की भीड़ टूट पड़ी। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज को मिलाकर पहले दिन साढ़े आठ सौ से ज्यादा पर्चे बने। कई मरीज वार्डों में भर्ती भी किए गए। मेडिकल कॉलेज में दोपहर 12 बजे तक ही पर्चे बनने से कई मरीजों को बिना चिकित्सक ीय परीक्षण कराए ही लौटना पड़ा।
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कोविड की दूसरी लहर में भयावह हालात पैदा कर दिए थे। इस कारण सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गई थीं। अब कोरोना के मामले थमने के बाद सोमवार से मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज और जिला अस्पताल में ओपीडी का संचालन शुरू हो गया है। तीनों ही अस्पतालों में सबसे ज्यादा 360 पर्चे मेडिकल कॉलेज में बने। जबकि, सात मरीजों को वार्ड में भर्ती किया गया। इसके अलावा जिला अस्पताल में 359 पर्चे बने। आयुर्वेदिक कॉलेज में 136 मरीजों ने पर्चा बनवाया। कुल मिलाकर तीनों ही अस्पतालों में साढ़े आठ सौ पर्चे बने। इसके अलावा कई मरीजों को वार्डों में भर्ती भी किया गया। सरकारी अस्पतालों में रियायती दरों पर जांचें होने, अधिकतर दवाएं नि:शुल्क मिल जाने की वजह से अधिकतर मरीज यहां दिखाने के लिए आते हैं। ऐसे में ओपीडी खुलते ही पहले दिन मरीजों की भीड़ डॉक्टरों को दिखाने के लिए टूट पड़ी। कई ऐसे मरीज भी आए, जिनका इलाज पहले से चल रहा था और ओपीडी बंद होने से इलाज बीच में ही रुक गया था।
ये बोले मरीज
20 दिन पहले बच्ची घर पर गई गई थी, इससे उसे पैर और कमर में दर्द शुरू हो गया। सरकारी अस्पताल की ओपीडी शुरू होने का इंतजार कर रही थी। जैसे ही जानकारी हुई तो सोमवार को जिला अस्पताल दिखाने आ गई। - गीता, बड़ागांव गेट।
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त्वचा की समस्या को दिखाने के लिए डॉक्टर के पास आया हूं। पहले से यहां पर इलाज चल रहा था। कोरोना कर्फ्यू में ओपीडी बंद होने से समस्या बढ़ गई। निजी अस्पताल में दिखाने पर आराम नहीं मिला। - एसके बाजपेयी, आईटीआई।
दो-तीन महीने से पेट की समस्या बनी हुई थी। कुछ दिन पहले जिला अस्पताल आया तो पता चला ओपीडी बंद है। निजी अस्पताल में काफी पैसा खर्च हो गया और आराम भी नहीं मिला। सोमवार को दिखाने आया हूं। - राकेश, ग्वालटोली।
टीबी की समस्या से ग्रसित हूं। कोरोना कर्फ्यू में जिला अस्पताल की ओपीडी बंद हो गई तो ग्वालियर दिखाने चला गया। अब जैसे ही फिर जिला अस्पताल की ओपीडी चालू हुई तो दिखाने आ गया हूं। - नाथूराम, राजपूत कॉलोनी।
एक महीने से सिर में दर्द बना हुआ है। निजी अस्पतालों में जांच के नाम पर खूब पैसा लिया जाता है। इसलिए मेडिकल कॉलेज की ओपीडी खुलने का इंतजार कर रही थी। अब यहां इलाज कराने आई हूं। - लक्ष्मीदेवी, नगरा।
फोड़ा हो जाने पर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिखाया था। बीच में यहां ओपीडी बंद हो गई। इलाज न चल पाने से फोड़ा बड़ा हो गया। सोमवार को ओपीडी में दिखाने के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन का कहा है। - गौरीशंकर, पूंछ।
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