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झांसी: बीमार कर सकता समोसे, पकौड़े का जायका, लिवर, किडनी फेल होने से लेकर कैंसर तक का खतरा

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झांसी। एक तेल को बार-बार गर्म करके बनने वाले पकवानों को खाना लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। पेट में गैस बनने, अपच, खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से लेकर लोगों को फैटी लिवर तक हो जा रहा है। डॉक्टरों की मानें तो कई लोगों की किडनी खराब से लेकर कैंसर होने तक के पीछे यह भी एक वजह हो सकती है।
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गर्म समोसे, पकौड़े का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाता है। इनकी दुकानों पर सुबह से लोगों की भीड़ लगी रहती है। इन्हें खरीदते समय लोग जरा सा भी ध्यान नहीं देते कि ये उनकी सेहत पर किस कदर भारी पड़ सकता है। कई दुकानदार बार-बार एक ही तेल को गर्म करके पकवान बनाते हैं। फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि कई बार तेल गर्म करने से उसमें ट्रांस फैटी एसिड बनना शुरू हो जाता है। ये एसिड तेल को हर बार गर्म करने पर पांच से दस फीसदी बढ़ता जाता है। फिजीशियन डॉ. राजीव जैन ने बताया कि बार-बार तेल गर्म करने से प्रोटीन, वसा जल जाता है और पौष्टिकता खत्म हो जाती है। इससे पाचन में दिक्कत होती है। तेल को पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे कैंसर सेल विकसित हो जाते हैं। पाचन क्रिया प्रभावित होने से लिवर भी खराब हो जाता है। हानिकारक पदार्थ किडनी में जमा हो जाते हैं। इससे किडनी फेल हो सकती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले 40 फीसदी मरीज तो पेट में गैस, अपच, कब्ज, आंतों में कैंसर आदि समस्या लेकर आते हैं। इनमें ज्यादातर लोग वो होते हैं, जो लंबे समय से बाहर का तला-भुना खा रहे होते हैं।
हार्ट अटैक आने का भी रहता है खतरा
ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. निर्देश जैन का कहना है कि लगातार हार्ट अटैक के मामले बढ़ते जा रहे हैं। खासकर 40 साल से कम उम्र के युवाओं को भी हार्ट अटैक होने लगा है। इसके पीछे की एक वजह ज्यादा तनाव लेना तो है ही, साथ ही लोग बाहर का भी खूब तला-भुना खाने लगे हैं। एक ही तेल को कई बार गर्म करके बने पकवान खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है। ये ह्रदय की नसों में जमकर ब्लॉकेज कर सकत है और हार्ट अटैक आने की आशंका बढ़ जाती है।
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किसी भी खाद्य तेल को तीन बार से ज्यादा गर्म नहीं किया जाना चाहिए। वरना खाद्य तेल का टोटल पोलर कंपाउंड (टीपीसी) बढ़ जाता है। 25 फीसदी से अधिक टीपीसी हो जाने पर खाना खाने योग्य नहीं होता है। लगातार अभियान चलाकर दुकानदारों को इसको लेकर जागरूक किया जा रहा है। - चितरंजन कुमार, जिला अभिहित अधिकारी।
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