स्मार्ट सिटी का काम जल्द शुरू होगा। इसके लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (सलाहकार) नियुक्त किया जाएगा, जो स्मार्ट सिटी के अंतर्गत होने वाले काम के सलाहकार होंगे। आडीटर नियुक्ति करने के लिए भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक नई दिल्ली को दो चिट्ठियां लिखी जा चुकी हैं, पर अभी तक जवाब नहीं आया है। इसलिए अब फिर से चिट्ठी लिखी जाएगी।
कंसलटेंट नियुक्ति के बाद स्मार्ट सिटी केे कामों की निगरानी के लिए सीएस (कंपनी सैकेटरेट) नियुक्त किया जाएगा। स्मार्ट सिटी के लिए जारी फंड का हिसाब- किताबरखने के लिए चीफ फाइनेंस आफीसर नियुक्त किया जाएगा। टूरिज्म और हेरीटेज (पर्यटन) के विकास के लिए केंद्र सरकार व स्मार्ट सिटी के फंड से 15.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए सबसे पहले टूरिस्ट इनफारेमेशन कियोस्क शहर में जगह-जगह लगाए जाएंगे, ताकि शहर में आने-जाने वालों को कहीं भी जाने के बारे में किसी से पूछना न पड़े। महारानी झांसी का किला और महाराजा गंगाधर राव की समाधि आने-जाने वालों के लिए सुविधाजनक रास्ते बनाए जाएंगे।
ऐरिया बेस्ड डेवलपमेंट के अंतर्गत सिविल लाइन व सीपी मिशन कंपाउंड वार्ड में ड्रेनेज सिस्टम ठीक होगा। इसके बाद अलग-अलग अविकसित वार्डों में ड्रेनिज सिस्टम सही किया जाएगा, जिस पर 13.06 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेनसिटी के अंतर्गत ट्रैफिक कंट्रोल किया जाएगा, ताकि शहरवासियों का समय बर्बाद न हो। इस पर 42.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्मार्ट सिटी के काम शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (पीएमसी) नियुक्ति के लिए 28 दिसंबर तक टेंडर मांगे गए थे। इसमें तीन टेंडर आए। अब इनका मूल्यांकन किया जा रहा है। जल्द ही कंसलटेंट नियुक्त कर दिया जाएगा।
मंडलायुक्त ने बैठक बुलाई
मंडलायुक्त / झांसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष मंडलायुक्त अमित गुप्ता ने प्रथम वार्षिक साधारण सभा की बैठक बुलाई। इसमें बताया गया कि अगले साल से स्मार्ट सिटी को लेकर कामों में तेजी आएगी, इसलिए सभी अधिकारी व कर्मचारी इसके लिए तैयार रहें। मंडलायुक्त ने अब तक की प्रगति के बारे में जानकारी ली। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी/ नगर आयुक्त प्रताप सिंह भदौरिया, टाउन प्लानर एन के पुष्कर्ण, नोडल अधिकारी/ अधिशासी अभियंता एके शर्मा मौजूद रहे।
ये हैं बड़ी समस्याएं
- प्रमुख समस्या वाहन पार्किंग की है। अभी कोई पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण जहां मर्जी वहां वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। जीवनशाह तिराहे पर बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े होने से दिन में कई बार जाम लगता है। यही स्थिति बड़ा बाजार, सीपरी बाजार, बस स्टैंड और मेडिकल कालेज की है।
- अभी जिसे जहां मर्जी होती है, कचरा फेंक देता है। कचरा घर बने होने और डस्टबिन रखी होने के बाद भी नागरिक दूर से ही कचरा फेंक कर चले जाते हैं। इससे आसपास गंदगी फैलती है। स्मार्ट सिटी को एक साल में कचरा घर फ्री बनाना है, लेकिन लगता नहीं है कि यह लक्ष्य पूरा होगा।
- शौचालय व मूत्रालय तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन मूत्रालयों में लगे यूरिनल पॉट सुरक्षित नहीं हैं। महारानी लक्ष्मीबाई पार्क हो, नगर निगम कैंपस हो, ग्वालियर रोड पर बने मूत्रालय हों अथवा बाजार में किसी भी स्थान पर बने मूत्रालय कोई भी सुरक्षित नहीं है।
- व्यापारियों को चाहिए कि दुकानों के बाहर अतिक्रमण न करें, क्योंकि अतिक्रमण से जाम की स्थिति बनती है और आने-जाने वाले बेवजह ही लेट हो जाते हैं। स्मार्ट सिटी में सर्वाधिक जोर अतिक्रमण हटाने को लेकर है। इसलिए अतिक्रमण साफ करना प्रमुख चुनौती होगी।
खुद भी बनें स्मार्ट
- सड़कों व गलियों में कचरा नहीं फेकें।
- नो पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी न करें।
- नालियों व सड़कों पर अतिक्रमण न करें।
- फुटपाथ पर अवैध कब्जा न करें।
- सड़क पर इधर-उधर न थूकें।
- ट्रैफिक नियमों का पालन करें।