झांसी। सपरार प्रखंड की ओर से बिना टेंडर कराए ही 22 लाख रुपये की सिल्ट सफाई कराने के मामले में अनियमितता की जांच कराने के निर्देश सिंचाई मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने दिए हैं। सिंचाई मंत्री ने मुख्य अभियंता को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।
सपरार प्रखंड को रानीपुर नहर प्रखंड में सिल्ट सफाई का काम कराना था। इसके लिए 22 लाख रुपये जारी हुए। इसके जरिए 56 किलोमीटर लंबी रानीपुर नहर के साथ निमोनी, स्यावनी, दुर्गापुर, रूपाधमना, तिलैरा, लिंधौरा, पसौरा, गुढ़ा, बिरौना, टोला, स्यावरी, सुहागपुरा, गढ़वा, बरौरी, अक्सेव माइनर, मगरपुर की सिल्ट सफाई होनी थी। प्रावधानों के मुताबिक इसके लिए ई-टेंडरिंग कराना था। लेकिन एक्सईएन ने यह पूरा काम बिना टेंडर कराए ही बांट दिए।
दरअसल, हर साल रबी सीजन से पहले एक बार सिल्ट सफाई कराई जाती है। इसके लिए सितंबर-अक्तूबर का समय तय माना जाता है। लेकिन जानबूझकर यह कभी तयशुदा समय पर शुरू नहीं होता। आखिर में कम समय का हवाला देते हुए बिना टेंडर कराए यह काम चहेतों को दे दिया जाता है। इस बार भी सपरार प्रखंड ने इसी तर्ज पर आखिरी तिथि का हवाला देते हुए 22 लाख की सिल्ट सफाई का काम बिना टेंडर कराए ठेकेदारों में बांट दिया। इस अनियमितता की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद यह मामला शासन तक पहुंच गया। इसके बाद सिंचाई मंत्री ने मुख्य अभियंता महेश्वरी प्रसाद को जांच कराने के निर्देश दिए।
शासन से इस संबंध में जांच करने के निर्देश मिले हैं। जांच भी शुरू करा दी गई है। इससे संबंधित सभी फाइल तलब की गई है। जांच पूरी करके रिपोर्ट जल्द शासन को भेज दी जाएगी। महेश्वरी प्रसाद, मुख्य अभियंता
फुल रेट पर कराए गए काम
टेंडर कराने से न सिर्फ पारदर्शिता बल्कि सरकारी धन की भी बचत होती है। सिंचाई विभाग में अमूमन 25-30 फीसदी बिलो रेट पर टेंडर होता है लेकिन, बिना टेंडर कराए जाने से यह काम फुल रेट से कराया गया।