झांसी। नगर निगम में सफाई कर्मचारी सफाई कार्य छोड़कर वाहन दौड़ा रहे हैं। जबकि वाहन चालक घर बैठे वेतन ले रहे हैं। वाहन चालकों की मनमानी का आलम यह है कि कई ड्राइवरों ने हेल्परों को गाड़ियां सौंप रखी हैं। मामले को लेकर पार्षदों ने जांच की मांग की है।
नगर निगम की कर्मशाला में 137 वाहन हैं। ये वाहन रोज वार्डों में सफाई कार्य कराने के लिए दौड़ते हैं। नगर निगम में 89 वाहन चालक आउटसोर्स पर तैनात हैं। इसके साथ ही 13 नियमित सफाई कर्मचारियों और 27 संविदा कर्मचारी सफाई छोड़कर वाहन दौड़ा रहे हैं। जबकि इन सफाई कर्मचारियों को हर महीने हजारों रुपये का वेतन दिया जाता है। बताया जाता है कि सालों से तैनात सफाई कर्मचारियों को वार्डों में भेजने के लिए कभी पहल नहीं की गई। वहीं सफाई कर्मचारियों की तैनाती
वार्डों में सफाई कार्य में दिखाई जाती है और वेतन भी स्वास्थ्य विभाग से निकलता है। सफाई कर्मचारियों को वाहन चलाने को लेकर तमाम वाहन चालक मनमानी पर उतारू हैं। कई वाहन चालक ऐसे हैं, जिन्होंने हेल्परों को वाहन संचालन का जिम्मा सौंपा हुआ है। पार्षद विकास खत्री का कहना है कि वार्डों में सफाई होती नहीं है। जब सफाई कर्मचारी वाहन चलाएंगे, तो सफाई कैसे होगी? वहीं पार्षद महेश गौतम का कहना है कि कई वाहन चालक घर बैठे वेतन ले रहे हैं। उन्होंने हेल्पर रख लिए हैं। जो वाहन चलाते हैं। इसकी जांच कराई जाए।
डीजल चोरी का चलता है खेल
नगर निगम में वाहनों के संचालन में डीजल चोरी का खेल चलता है। वाहन चालक को कार्यशाला से डीजल की पर्ची दी जाती है। वार्ड में काम करने के बाद वाहन चालक इधर-उधर गाड़ी खड़ी करके समय बिताते हैं। समय पूरा होने पर वाहन को कार्यशाला में खड़ा कर दिया जाता है। मामले को लेकर पहले भी सवाल उठे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराएंगे। वाहन चालकों की उपस्थिति शत प्रतिशत सुनिश्चित की जाएगी। - अवनीश राय, नगर आयुक्त