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रामलीला की खातिर ‘राम’ ने टाली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

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रामलीला की खातिर ‘राम’ ने टाली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
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हिमांशु पांडेय
झांसी। बृहस्पतिवार से सदर बाजार में रामलीला की शुरुआत होगी। इसकी तैयारियां शुरू हो गईं हैं। खासतौर पर रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकार अभ्यास में जुट गए हैं। यहां राम की भूमिका निभाने का अवसर मिलने पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने अपना रेल आरक्षण निरस्त करा दिया। वहीं, कई परिवार ऐसे भी हैं जो पीढ़ियों से रामलीला के मंचन से जुड़े हैं। लीला आरंभ होते ही अपने कामकाज छोड़ यह लोग इसकी तैयारियों में तन-मन से जुट जाते हैं।
शहर की सबसे पुरानी सदर बाजार की रामलीला रिहर्सल जन्माष्टमी के साथ आरंभ हो जाती है। यहां राम की भूमिका के लिए शुभम शर्मा को चुना गया था। उन्होंने तैयारी भी की थी। लेकिन, कुछ दिन पहले दादी की मृत्यु हो जाने से उनको हटना पड़ा। आखिरी समय में कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र अर्पित मुखरैया को जिम्मेदारी सौंपी गई। अर्पित परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली 29 सितंबर को दिल्ली जाने वाले थे। उन्होंने इसके लिए रिजर्वेशन भी करा रखा था। लेकिन, राम की भूमिका के लिए चुने जाने पर उन्होंने रिजर्वेशन निरस्त करा दिया। राम का किरदार मिलने से खुश अर्पित कहते हैं अतिरिक्त मेहनत करके पिछड़ी पढ़ाई पूरी करने की कोशिश करेंगे।
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वहीं, दशरथ का पात्र पिछली चार पीढ़ियों से एक परिवार ही निभाता आ रहा है। मौजूदा समय में शांतनु पांडेय पारिवारिक जिम्मेदारी की तरह इस किरदार को निभा रहे हैं। मंचन में वह अकेले नहीं, बल्कि उनका पुत्र कौस्तुभ उनके साथ लक्ष्मण की भूमिका में होगा। शांतनु के मुताबिक उनके बाबा कमेटी से जुड़े थे। रामलीला आरंभ होने के साथ ही उनके परिवार के लोग अपना काम स्थगित करके इसमें जुट जाते हैं।
ऋंगी ऋषि का किरदार निभाने वाले अजीत मिश्रा भी रामलीला से जुड़ाव के चलते पिछले कई वर्षों से किरदार निभा रहे हैं। अजीत एक संस्कृत विद्यालय में प्रधानाचार्य हैं, लेकिन रामलीला में दिलचस्पी होने के नाते किरदार निभाने के लिए समय निकालते हैं। विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त कैशियर एनडी सेन भी बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी करते हैं। बुलंद आवाज में संवाद अदायगी के लिए पहचाने जाने वाले एनडी कई बार रावण का किरदार निभा चुके। इस बार वह सूर्पनखा के किरदार में दिखाई देंगे। मुख्य निर्देशक शांतनु पांडेय के मुताबिक रामलीला में सात साल से पैंसठ साल तक के लोग विभिन्न किरदारों में हैं, यही इस रामलीला की खूबी भी है। उनका कहना है किसी किरदार को पारिश्रमिक नहीं दिया जाता
कलाकारों को निभाने पड़ते हैं कठोर नियम
राम, लक्ष्मण, सीता, दशरथ, हनुमान, भरत, वशिष्ठ आदि महत्वपूर्ण किरदार निभाने वालों को दिनचर्या में भी कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है। निर्देशक शांतनु के मुताबिक जन्माष्टमी के बाद मुकुट पूजन होता है। उसी के साथ पात्रों का चयन कर लिया जाता है। अमूमन रिहर्सल के समय से ही पात्रों को सात्विक भोजन करने समेत अन्य नियमों के पालन की हिदायत दी जाती है लेकिन, मंचन आरंभ होने पर सभी पात्रों को कड़ाई से इसका पालन करना अनिवार्य होता है। किसी भी पात्र के भोजन में लहसून-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता। किसी भी तरह के नशे से भी दूर रहते हैं। कई मुख्य पात्र मंचन अवधि तक जमीन पर सोते हैं। मंचन के आखिरी में हवन के बाद ही वह अपनी पुरानी दिनचर्या में लौटते हैं।
सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी है संवाद परंपरा
रामलीला में संवाद अदायगी का अपना अलग ही अंदाज होता है। बुंदेलखंड क्षेत्र की रामलीला में इस्तेमाल होने वाले संवादों की परंपरा सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। जानकारों का कहना है कि झांसी निवासी प. गयादीन शर्मा के ग्रंथ में संग्रहित संवाद ही ज्यादातर इस्तेमाल में लाए जाते हैं। प. गयादीन ने गायन शैली में लिखी गई राधेश्याम रामायण, ईसुरी के कवित्त एवं तुलसी की चौपाई को समाहित करके ग्रंथ की रचना की। उसमें संग्रहित संवाद ही अधिकांश रामलीलाओं में इस्तेमाल में लाए जाते हैं।
बारिश ने बढ़ाई आयोजकों को परेशानी
लगातार हो रही बारिश ने भी आयोजक मंडल को परेशानी में डाल दिया है। इसको देखते हुए अब पंडाल में ऐसी व्यवस्था की जा रही, जिससे बारिश होने पर भी लीला में कोई व्यवधान न आए और दर्शकों को भीगने से बचाया जा सके। आयोजकों का कहना है कि पंडाल को वाटरप्रूफ बनाए जाने के साथ ही मंच को भी सुरक्षित किया जा रहा है।
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रिहर्सल में कलाकार बहा रहे पसीना
रामलीला के दृश्यों के सजीव मंचन के लिए कलाकार रिहर्सल में जमकर पसीना बहा रहे हैं। मंच संचालक एनडी सेन अपनी देखरेख में कलाकार से संवाद अदायगी कराते हैं। गड़बड़ी होने पर खुद ही डायलॉग बोलकर भी नए कलाकारों को समझाते हैं। मंचन आरंभ होने में अब चंद दिन ही शेष बचे, ऐसे में सोमवार को सुबह से ही रिहर्सल आरंभ हो गई। कई बच्चे स्कूल खत्म होने के बाद रिहर्सल के लिए वहां पहुंचे।
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