झांसी। सदर बाजार के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉक्टर पर गलत रिपोर्ट देने की शिकायत की जांच शुरू होने के 12 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम को संचालक के दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा भी दबाव में आकर जांच में देरी की जा रही है। पीड़ित महिला ने यह गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की है। साथ ही, जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग दोहराई है। पीड़िता का कहना है जांच में देरी हो रही है। इससे उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
खातीबाबा निवासी महिला ने डीएम से शिकायत की थी कि सदर बाजार स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर नौ महीने की गर्भावस्था के दौरान पांच अल्ट्रासाउंड कराए। हर बार डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की सामान्य रिपोर्ट दी। मौखिक रूप से भी यह बताया गया कि गर्भावस्था में शिशु बिल्कुल सामान्य है। किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। मगर जब सिजेरियन डिलीवरी हुई तो डॉक्टर ने बताया कि बच्चा कई प्रकार के जन्मजात विकास से ग्रसित है। अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में सिजेरियन डिलीवरी हुई और अगले ही दिन बच्चे की सांसें भी थम गईं।
डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर के बालरोग विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि गर्भावस्था के तीन से चार महीने में होने वाले लेवल-2 के अल्ट्रासाउंड में जन्मजात विकार या डाउन सिंड्रोम के बारे में बताया जाना चाहिए था। मगर अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर ने लेवल-2 का अल्ट्रासाउंड भी सामान्य दिया। शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन की तरफ से जांच समिति का गठन किया गया है। वहीं, पीड़ित महिला ने दोबारा अधिकारियों से शिकायत की है कि रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के बाद भी डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करते रहे। आखिर उन्हें अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति किसने दी? जांच समिति ने 12 दिन बाद भी कोई आख्या उपलब्ध नहीं कराई है। टीम को अल्ट्रासाउंड संचालक के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रशासन द्वारा भी दबाव में आकर जांच में देरी की जा रही है। उन्होंने जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।