झांसी। सूखे की मार झेल रहे किसानों पर विद्युत विभाग भी रहम करने को तैयार नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में रीडिंग व्यवस्था न होने के बाद भी उनको न्यूनतम यूनिट के नाम पर भारीभरकम बिल थमाया जा रहा है। इससे ग्रामीण उपभोक्ता हैरान हैं। बिल ठीक करवाने के लिए उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ रहा है।
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब पचास हजार विद्युत उपभोक्ता हैं। विभाग ने नगर पंचायत, नगर पालिकाओं में तो मीटर रीडर लगा कर बिल बनाने की व्यवस्था कर रखी है मगर गांवों में हर दो माह में लाल रंग के बिल आगरा से बनकर आते हैं। गांवों में रीडिंग लेने की कोई व्यवस्था नहीं है।
विभाग ने गांवों में सुविधाएं तो नहीं बढ़ाई, मगर मीटर जरूर नए लगाना शुरू कर दिए हैं। गांवों में अधिकांश उपभोक्ताओं के मीटर खराब चल रहे हैं। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में अक्सर हाई लॉ वोल्टेज की समस्या बनी रहती है, इससे मीटर फुंक जाते हैं।
इधर, विभाग ने कुछ माह से गांवों में रीडिंग के हिसाब से बिल न बनने के बाद भी प्रति किलोवाट 104 यूनिट का बिल बनाना शुरू कर दिया है। जैसे कि किसी ग्रामीण उपभोक्ता को लंबे समय से बिल प्राप्त नहीं हुआ और वह कार्यालय में आकर बिल बनवाता है तो उसे न्यूनतम यूनिट के हिसाब से बिल बनाकर थमाया जा रहा है।
इस कारण जिन किसानों को अब तक एक माह में एक सौ से दो सौ तक बिल भरना पड़ता था, उनको अब पांच सौ से छह सौ रुपये तक बिल बनाकर दिया जा रहा है। इससे किसान हैरान हैं। अगर उपभोक्ता का मीटर चालू हैं तो वह जेई से मीटर की रीडिंग को सत्यापित कराके लाए, अन्यथा उसे न्यूनतम के हिसाब से बिल भरना होगा। जेई से रीडिंग को सत्यापित कराके लाना आसान नहीं होता।
विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता वितरण पी के जैन ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की इस समस्या को तो स्वीकार किया, मगर कोई हल वह भी नहीं बता सके।