झांसी। कानपुर से दस इंजन मेंटेनेंस के लिए मिलने पर शनिवार को एसी लोको शेड में कर्मचारियों ने काम बंद रखकर हंगामा किया। उनका कहना था कि शेड के पास पहले से ही 207 इंजन हैं और तीन सौ कर्मचारियों की कमी चल रही है। इसके बाद भी इंजनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। हालांकि, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता से वार्ता के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी।
अभी झांसी एसी लोको शेड के पास 207 इलेक्ट्रिक इंजन हैं। इनमें 100 डब्लूएजी 5 और 107 डब्लूएजी 7 क्षमता के हैं। इन इंजनों को इलेक्ट्रिक लाइन पर अलग-अलग स्टेशनों की तरफ ट्रेन और मालगाड़ी में लगाकर भेजा जाता है। यह इंजन ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन से चलते हैं। इन इंजनों के रखरखाव के लिए 581 कर्मचारी हैं, जो तीन शिफ्टों में काम करते हैं। इस हिसाब से 300 कर्मचारियों की कमी चल रही है। इनकी पूर्ति आउट सोर्स कंपनी से पूरी की जा रही है। यहां प्रतिदिन तीन से पांच इंजनों का माइनर शेड्यूल मेंटेनेंस किया जाता है। एक इंजन का मेंटेनेंस करने में 15 से 20 कर्मचारी लगते हैं।
रेल प्रशासन कानपुर से दस इंजन और मेंटेनेंस के लिए मांगा रहा है। इनमें दो इंजन आ गए हैं। शनिवार की सुबह इनमें से एक इंजन को मेंटेनेंस के लिए प्लेटफार्म पर लगा दिया गया। इस बात को लेकर कर्मचारियों में गुस्सा भड़क गया। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के शाखा सचिव डीके खरे और नॉर्थ सेंट्रल इंप्लाइज संघ के शाखा सचिव राजेश गुप्ता के नेतृत्व में कर्मचारियों ने काम बंद करके हंगामा शुरू कर दिया। बाद में वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता मयंक शांडिल्य ने दोनों यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग वार्ता की। फैसला लिया गया कि उच्च अधिकारियों के साथ वार्ता के बाद ही अब कानपुर से आए इंजनों पर निर्णय जाएगा। दोपहर एक बजे हड़ताल खत्म हो गई।