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Jhansi News: पांच साल में 31 हजार आयुष्मान मरीजों के इलाज पर खर्च हुआ 73 करोड़

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। पांच सालों में आयुष्मान योजना के तहत 31 हजार से ज्यादा मरीजों ने झांसी में इलाज कराया है। इन पर सरकार का 73 करोड़ रुपये खर्च आया है। वहीं, सरकारी अस्पतालों की तुलना में योजना के लाभार्थियों ने इलाज कराने के लिए निजी अस्पतालों को पहली पसंद बनाया है। सरकारी के मुकाबले दोगुने मरीजों का इलाज नर्सिंगहोमों में हुआ है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थी पांच लाख रुपये तक का सालाना इलाज नि:शुल्क करा सकता है। शुरु में जब ये योजना शुरू हुई तो कम ही निजी अस्पताल पंजीकृत थे। मगर धीरे-धीरे इनका दायरा बढ़ने लगा। मौजूदा समय में योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग में 42 नर्सिंगहोमों ने पंजीकरण करा लिया है। जबकि, मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत सीएचसी, पीएचसी, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर समेत 17 स्वास्थ्य इकाइयों में आयुष्मान रोगियों का इलाज किया जाता है। आंकड़ों को देखें तो 2018 से अब तक निजी अस्पतालों में 20300 मरीजों ने इलाज कराया है। इन पर 58.26 करोड़ रुपये खर्च आया है। इसमें शहर के सात निजी अस्पतालों में ही 14199 मरीजों का उपचार हुआ है। जबकि, सरकारी अस्पतालों में 11394 रोगियों ने इलाज कराया है। इन पर 15.11 करोड़ रुपये खर्च आया है। सरकार द्वारा अस्पतालों को लगातार भुगतान भी किया जा रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि सरकारी की तुलना में बेहतर सुविधाएं मिलने के चलते ज्यादातर मरीजों ने निजी अस्पतालों में ही इलाज कराना पसंद किया है।
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चार में मरीज शून्य, एक में आया सिर्फ एक मरीज
सरकारी अस्पतालों के आंकड़े देखें तो भेल अस्पताल, सीएचसी बरुआसागर, रेलवे अस्पताल और पीएचसी शाहजहांपुर में एक भी आयुष्मान मरीज इलाज कराने नहीं आया है। जबकि, सीएचसी गरौठा में सिर्फ एक रोगी का उपचार हुआ है। सीएचसी में सर्वाधिक 580 रोगियों का उपचार गुरसराय में हुआ है। जबकि, सरकारी चिकित्सा इकाइयों में मेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक 6052 ने इलाज कराया है। 1880 मरीजों के साथ जिला अस्पताल दूसरे पायदान पर है।
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वर्जन..
झांसी में आयुष्मान योजना का लाभ मरीजों को मिल रहा है। पांच सालों में 31 हजार से ज्यादा मरीज योजना का लाभ ले चुके हैं। कई गंभीर बीमारियों तक के मरीज योजना के तहत ठीक हुए हैं। - अभिषेक गोस्वामी, जिला कार्यक्रम समन्वयक, आयुष्मान योजना।
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