जीएसटी का असर अब बाजार के साथ आमजन पर दिख रहा है।़ रोटी, कपड़ा और मकान तीनों महंगे हो गए हैं। पांच सौ की साड़ी अब सवा पांच सौ और दस लाख का फ्लैट अब साढ़े ग्यारह लाख का है।
जारी हुई नई नियमावली के मुताबिक खाने-पीने और कुछ आवश्यक सेवाओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। इसमें स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, बच्चों की ड्राइंग और रंग की किताबें, फूल झाडू़, काजल, नमक, खजूर का गुड़, बिना मार्का प्राकृतिक शहद, खुला पनीर, लस्सी, दही, दूध, अंडे, गुड़, बिना मार्का बेसन, बिना मार्का मैदा, बिना मार्का मैदा, बिना मार्का आटा और खुले खाद्य अनाज शामिल है। इस कारण बाजार में उक्त वस्तुओं की कीमत स्थिर बनी हुई हैं। जबकि ब्रांडेड कंपनी के आटा, दाल और चावल महंगे हो गए हैं। अब ब्रांडेड खाद्यान्न पर पांच प्रतिशत टैक्स है। दुकानदारों ने बढ़ी कीमत लेना शुरू कर दिया है।
अभी तक कपड़ा टैक्स मुक्त था। जीएसटी लागू होने के बाद अब एक हजार रुपये तक की कीमत के कपड़े पर पांच प्रतिशत और इससे अधिक पर 12 प्रतिशत टैक्स है। जैसे कि बाजार में पांच सौ रुपये की साड़ी अब सवा पांच सौ और 11 सौ की 1232 रुपये की है। इसके अलावा जीएसटी लगने के बाद पंजीकृत ठेकेदारों से मकान बनवाना या फ्लैट खरीदना भी महंगा हो गया है। अभी तक पंजीकृत ठेकेदार समाधान योजना का लाभ लेकर टैक्स बचा लेते थे, लेकिन जीएसटी में इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। पंजीकृत ठेकेदार पर 18 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान कर दिया गया है। जैसे कि, अभी तक एक हजार वर्ग फुट में घर बनवाने पर दस लाख रुपये लगते थे तो यह घर अब पंजीकृत ठेकेदार से बनवाने पर 11 लाख 80 हजार का पड़ेगा। इसी तरह बिल्डरों ने भी जीएसटी लगाकर फ्लैट की कीमत वसूलना शुरू कर दिया है।
थोक कपड़े के 100 कारोबारी पंजीकृत
महानगर में 125 थोक कपड़ा कारोबारी हैं। अभी तक कपड़ा करमुक्त होने के कारण कारोबारी बिना पंजीयन के ही व्यापार कर रहे थे, लेकिन अब 100 कारोबारियों ने जीएसटी में पंजीकरण ले लिया है। साथ ही बिल में टैक्स भी दर्शाना शुरू कर दिया है, ताकि रिटर्न भरते समय वे परेशानी से बच सके।
बचने का जुगाड़
ब्रांडेड चावल पर टैक्स बचाने के लिए कारोबारियों ने नया तरीका निकाल लिया है, जो बाजार में चर्चा में बना हुआ है। ऐसे व्यापारी दिल्ली से सादी बोरियों में ब्रांडेड चावल मंगा रहे हैं। इसके बाद गोदाम या दुकान में उसे ब्रांडेड मार्क लगे पैकेट और बोरियों में भर लेते हैं। ब्रांडेड खाली बोरियां कंपनी से मंगा ली जाती हैं। ऐसा ही आटे में करते हैं।