झांसी। किसी की जान बचाने से बड़ी खुदा की कोई इबादत नहीं है। रक्तदान करना भी रोजे से कम महत्व नहीं रखता है। यह कहना है जुनैद अख्तर का। वह अमर उजाला फाउंडेशन के जिला अस्पताल में आयोजित शिविर में रक्तदान करने आए थे। इसके लिए उन्होंने मंगलवार को रोजा नहीं रखा था।
संगम विहार आवास विकास कॉलोनी निवासी पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव जुनैद अख्तर की उम्र 30 वर्ष है। वह 12 साल की आयु से रोजे रखते आ रहे हैं। पिछले अठारह सालों के दरम्यान एक मौका भी ऐसा नहीं आया, जब उन्होंने रमजान माह में रोजा नहीं रखा। जुनैद ने बताया कि यह पहला मौका है, जब उन्होंने रोजा नहीं रखा। बावजूद, इसके उन्होंने रोजे से ज्यादा पुण्य हासिल कर लिया है।
जुनैद कहते हैं कि अल्ला ताला ने मानवता की सेवा को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को उनकी छुट्टी नहीं थी। दिन भर वर्किंग करनी थी। ऐसे में रक्तदान के बाद शारीरिक कमजोरी न हो, इसके लिए उन्होंने रोजा न रखना बेहतर समझा। बुधवार से वह फिर से रोजा रखना शुरू कर देंगे।
जुनैद इससे पहले भी दो बार रक्तदान कर चुके हैं। पहली बार उन्होंने अमर उजाला के पिछले साल आयोजित शिविर में रक्तदान किया था। दूसरी बार अमर उजाला से सूचना मिलने पर जर्मनी अस्पताल में एक मरीज को खून दिया था। तीसरी बार रक्तदान कर वह खासे उत्साहित नजर आए। उनके अलावा ग्यारह अन्य मुस्लिम युवकों ने भी रक्तदान किया। इनमें जीशान अख्तर, वसीम कुरैशी, एहसान खान, आमिर, आसिफ खान, अरशद अंसारी, इम्तियाज, इरशाद खान, शोएब खान, जावेद खान व अमजद आदि शामिल हैं।