ललितपुर। जिले की सात ग्राम पंचायतों के रोजगार सेवकों व ग्राम पंचायत
विकास अधिकारी को मनरेगा में रुचि नहीं लेना महंगा पड़ गया है। सीडीओ ने
मनरेगा कार्य ठप होने पर रोजगार सेवकों को हटाने के निर्देश खंड विकास
अधिकारियों को दिए हैं। वहीं, ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के विरुद्घ
प्रशासनिक कार्रवाई के लिए भी निर्देशित किया है।
तमाम निर्देशों के बाद
भी जिले की अनेक ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्य प्रारंभ नहीं हो रहे
हैं, जिससे न तो श्रमिकों को काम मिल पा रहा है और न ही मनरेगा की धनराशि
व्यय हो पा रही है। बीते दिनों डीएम जुहेर बिन सगीर ने समीक्षा के दौरान
प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दो कार्य अनवरत जारी रखने के निर्देेश
दिए थे। इसके बाद भी कई ग्राम पंचायतों में कार्य प्रारंभ नहीं हो सके।
मंगलवार को सीडीओ अरुण कुमार उपाध्याय ने एमआईएस की समीक्षा की, जिसमें
पाया कि ग्राम पंचायत बसवां, घटवार, मसौराखुर्द, बार, बंगरिया, कल्यानपुरा,
टीकरा तिवारी में तीन माह से धनराशि व्यय नहीं की गई है और न ही कोई कार्य
प्रारंभ हुए हैं। इस पर उन्होंने उन ग्राम पंचायतों के ग्राम रोजगार
सेवकों को पद से हटाते हुए समीप की ग्राम पंचायत के रोजगार सेवक से कार्य
लेने के निर्देश दिए हैं, साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के
विरुद्घ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए आरोप पत्र तैयार करने को कहा। सीडीओ के
सख्त रुख से ग्राम पंचायत कर्मियों में खलबली मच गई है।
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कूप पड़े अधूरे
मनरेगा
के अंतर्गत सैकड़ों की संख्या में कूप अधूरे पड़े हैं, जिस कारण लोगों को
उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ब्लाक बार की प्रगति सबसे ज्यादा दयनीय है।
यहां तीन सैकड़ा से अधिक कूप अधूरे हैं। इन कूपों को पूरा कराने के लिए
निर्देश जारी किए गए हैं।