झांसी। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में परिचालकों को आउटसोर्स पर रखने के मामले में गड़बड़झाला उजागर हुआ है। जिस फर्म को काम दिया गया जांच के दौरान उसकी ओर से लगाई गई एफडीआर फर्जी पाई गई। परिवहन अफसरों की मिलीभगत भी सामने आई है। इस मामले के उजागर होने के बाद एसएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
दरअसल, जून माह में 175 परिचालकों की भर्ती प्रक्रिया आरंभ हुई थी। इसके लिए कमेटी बनाई गई। जिसमें आरएम बांदा राजीव शर्मा, आरएम कार्मिक सत्येंद्र कुमार वर्मा, एआरएम फाइनेंस शरद श्रीवास्तव समेत अन्य अफसरों को शामिल किया गया। कमेटी ने बिना जांच-पड़ताल किए ही पयोधी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, बरेली को परिचालक आपूर्ति का ठेका थमा दिया। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई। एसएम संतोष कुमार ने खुद इस मामले की जांच की। इसमें गड़बड़ी पकड़ में आ गई। कागजातों की पड़ताल में मालूम चला कि टेंडर हथियाने में 95 लाख की फर्जी एफडीआर का इस्तेमाल हुआ। अब संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
परिचालकों की भर्ती के लिए जिस फर्म को चयनित किया गया था, उसकी एफडीआर व ईमेल फर्जी पाए गए। टेंडर प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। मुख्यालय को भी पत्र लिखा गया है
- संतोष कुमार, क्षेत्रीय सेवा प्रबंधक