झांसी। अब मानचित्र पास कराने की एवज मेें जल शुल्क भी चुकाना होगा। इस संबंध में शासन ने मंजूरी दे दी है। बोर्ड बैठक में मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अभी तक लखनऊ समेत चुनिंदा प्राधिकरण ही जल शुल्क वसूली करते थे। इस प्रस्ताव के मंजूर होने पर पचास रुपये प्रति मीटर की दर से चुकाना होगा।
भवन निर्माण मेें व्यापक पैमाने पर पानी का इस्तेमाल होता है। अधिकांश मामलों में अनियमित कनेक्शन से पानी का इस्तेमाल होता है। इसको देखते हुए सरकार ने पूरे प्रदेश में जल शुल्क लागू करने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत जल शुल्क नियमावली-2022 को मंजूरी दी गई। ले आउट प्लान के मुताबिक जल शुल्क भूमि के कुल क्षेत्रफल के आधार पर देना होगा। बहुमंजिला भवन निर्माण पर सभी तलों एवं बेसमेंट शामिल करते हुए कुल क्षेत्रफल पर शुल्क लिया जाएगा। जल शुल्क की दरें हर साल एक अप्रैल को पुनरीक्षित होंगी। जल शुल्क की राशि 10 लाख रुपये होने पर एक मुश्त ली जाएगी जबकि शेष रकम के बराबर किस्त बनाकर उनकी वसूली होगी। इसके लिए नौ प्रतिशत ब्याज लिया जा सकेगा। जेडीए अफसरों का कहना है कि मंजूरी के लिए इसे बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा।
नगर निगम को नहीं चुकाया मलवा शुल्क
जेडीए मलवा शुल्क के तौर पर भी भवन स्वामियों से मोटी रकम वसूल करता है। नियमों के मुताबिक निर्धारित समय के भीतर यह रकम नगर निगम को हस्तांतरित कर देना चाहिए लेकिन, पिछले काफी समय से यह पैसा नगर निगम के खाते में नहीं भेजा गया है। पार्षद भी इस मामले को लेकर कई बार हंगामा कर चुके हैं।