झांसी। जर्जर सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों से उठ रहे धूल के गुबार और सफाई के अभाव में ऊंची झाड़ियों के बीच गुम नाले-नालियां... खाली प्लॉटों पर मलबा व गंदगी और अव्यवस्था के अभाव में दम तोड़ रहीं इंडस्ट्रीज। यह हाल है उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की तरफ से विकसित बिजौली क्षेत्र का। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि प्रमुख गेट पर लगा यूपीसीडा का बोर्ड तक क्षतिग्रस्त हो चुका है, लेकिन उसकी मरम्मत तक नहीं की जा सकी।
औद्याेगिक इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए गठित उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने बिजौली में तीन फेज में भूमि लेकर इंडस्ट्रीज स्थापित कराई। 47.68 एकड़ में पहला फेज, 39 एकड़ में दूसरा फेज व 126 एकड़ में तीसरे फेज में औद्योगिक क्षेत्र को विकसित कर उद्यमियों को भूमि आवंटित किया। सड़क, बिजली, पानी के साथ मुख्य गेट पर बड़े-बड़े प्रवेश द्वार बनवाए, लेकिन देखरेख के अभाव में 50 प्रतिशत से अधिक इंडस्ट्रीज में ताला लग गया है। शेष इंडस्ट्रीज की हालत भी ठीक नहीं है। अभी हालत यह है कि यूपीसीडा कार्यालय पहुंचने की प्रमुख सड़क जर्जर है। चार पहिया वाहनों के निकलने के दौरान धूल के गुबार उठ रहे हैं। पानी की निकासी के लिए बने नाले-नालियां सफाई के अभाव में गंदगी से बजबजा रही हैं। आसपास इतनी ऊंची झाड़ियां उगी हैं कि नाले-नालियां दिखाई तक नहीं दे रहे। यूपीसीडा के अंदर बनी अधिकांश इंडस्ट्रीज ताले में बंद हैं तो आसपास खाली पड़े प्लॉटों में मलबा व गंदगी का अंबार लगा है।
199 औद्योगिक इकाइयां थीं : यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप कुमार कहते हैं कि बिजौली ग्रोथ सेंटर में शुरुआत में 199 औद्योगिक इकाइयां संचालित थीं। अब 50 प्रतिशत से अधिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं। विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी किया गया, लेकिन उद्यमियों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। इतना हीं नहीं आवंटन के बाद खाली भूमि की रजिस्ट्री तक नहीं करा रहे हैं, ऐसे में सभी को नोटिस जारी किया गया है।
10 करोड़ में दुरुस्त होंगी सड़कें व नाले-नालियां
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए 10 करोड़ की लागत से सभी सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। फुटपाथ के लिए एपेक्स बिछाए जाएंगे। नाले-नालियों की मरम्मत के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र के प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जाएगा। क्षेत्रीय प्रबंधक का दावा है कि नियमित सफाई कराई जाती है और हर साल पेंटिंग भी कराई जाती है। उन्होंने उद्यमियों से भी सहयोग मिलने पर बेहतर व्यवस्था व माहौल देने की बात कही।