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रानी पर केंद्रित टूरिस्ट सर्किट का रोड मैप तैयार

Sun, 31 May 2015 12:26 AM IST
झांसी / ब्यूरो
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वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई पर केंद्रित टूरिस्ट सर्किट का पर्यटन व पुरातत्व विभाग द्वारा रोड मैप तैयार कर लिया गया है। रानी से जुड़ीं सोलह पुरा धरोहरों व स्थलों को भी चिह्नित किया गया है, जिनके संरक्षण व संवर्धन की योजना तैयार की जा रही है।
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1857 के गदर में रानी लक्ष्मीबाई ने स्वराज्य की खातिर हंसते - हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। रानी का यह गौरव देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यही वजह है कि रानी की कर्मभूमि झांसी में पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। क्षेत्र के पर्यटन विकास व पर्यटकों को रानी के विषय में अधिक से अधिक जानकारियां देने के उद्देश्य से रानी पर केंद्रित पर्यटन परिपथ विकसित करने की योजना बनाई गई है। इतिहासकारों द्वारा दी गईं जानकारियों व विभिन्न स्थानों के भौतिक निरीक्षण के बाद पर्यटन व पुरातत्व विभाग द्वारा उक्त योजना का खाका खींच लिया गया है। यह परिपथ बुंदेलखंड के झांसी, दतिया, जालौन, भिंड व ग्वालियर को आपस में जोड़ेगा। इसके अलावा उक्त सभी स्थानों पर स्थित रानी से जुड़े स्मारकों का विकास किया जाएगा। इतना ही नहीं, इन स्मारकों को आपस में जोड़ने वाली सड़क का भी विकास होगा। साथ ही मार्ग में जगह - जगह पब्लिक सुविधा के संसाधन विकसित किए जाएंगे।

यह स्मारक /स्थान किए गए चिह्नित
- झांसी का किला
- रानी महल
- भांडेरी गेट
- भांडेर का महल, दतिया
- लोहागढ़ की गढ़ी, झांसी
- रामलला मंदिर, कोंच जालौन
- कालपी का किला, जालौन
- शिव मंदिर, चुर्खी जालौन
- सरवन की गढ़ी, जालौन
- गोपालपुर का किला, जालौन
- मिहोना, भिंड
- अमाया, भिंड
- इंदुर्खी, भिंड
- बरोली व टरोली, भिंड
- बिल्हाटी, ग्वालियर
- मुरार, ग्वालियर

‘रानी पर केंद्रित टूरिस्ट सर्किट का प्लान तैयार किया जा चुका है। यह कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद को भेज दिया गया है। चिह्नित स्थानों के विकास की योजना भी बनाई जा रही है।’
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- एस के दुबे, पुरातत्व अधिकारी
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