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जीवाणु और विषाणु को नियंत्रित करने में सक्षम है सफेद मूसली

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायोमेडिकल साइंस विभाग की तरफ से सफेद मूसली पर किए गए शोध में काफी बेहतर परिणाम सामने आए हैं। शोध में इस पौधे की जड़ों में कई जीवाणु, विषाणु और फंगल के संक्रमण को नियंत्रित करने संबंधी तत्वों की पहचान हुई है।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के नेचुरल रिसोर्स डाटा मैनेजमेंट सिस्टम की तरफ से मिली परियोजना के अंतर्गत बीयू का बायोमेडिकल संस्थान के शिक्षक डॉ. लवकुश द्विवेदी, फार्मेसी के डॉ. शशि आलोक और छात्र पंकज कुशवाहा सफेद मूसली पर शोध कर रहे है। डॉ. लवकुश ने बताया कि रक्त वाहिनियों को चौड़ा करने वाले एजेंट प्रोस्टाग्लैंडीन के निर्माण एवं नियंत्रण से संबंधित तत्व गैमोलेनिक तथा ऑक्टाडेकाट्राईनोइक एसिड की मौजूदगी के कारण यह पौधा सूजन की बीमारियों की रोकथाम में कारगर हो सकता है। सामान्यत: प्रजनन क्षमता बढ़ाने, मांसपेशिओं को सुदृढ़ करने और स्टेमना बढ़ाने संबंधी गुणों के लिए प्रसिद्ध इस पौधे में जीवाणु रोधी, वायरस रोधी और फंगल रोधी तत्व डोडेकानोइक एसिड तथा अनडेकानोइक एसिड भी पाए गए हैं। साथ ही विटामिन ई और के-वन के निर्माण से संबंधी फीटोल का भी यह एक अच्छा स्रोत है। इसमें खुजली, कफ, बलगम, उद्वेष्टरोधी, पाचन तंत्र, धमनियों की अनैक्षिक मांसपेशियों के ऐठन को रोकने संबंधी तत्व भी हैं। अपने कई गुणों के साथ सफेद मूसली फूड, फ्लेवर, खुशबू उद्योग के प्रयोग में आने वाले तत्वों से भी भरपूर है। सफेद मूसली अन्य औषधीय गुणों जैसे कि एंटी-टसिव, एंटी-प्रुरिटिक, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-स्पास्मोडिक, प्रोस्टाग्लैंडीन रोधक आदि के साथ औषधीय उद्योग के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पौधा है। पौधे के जड़ों और पत्तियों पर बीयू के इनोवेशन सेंटर की मशीनों की मदद से किए शोध में इन औषधीय गुणों की पहचान हुई है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल में यह अध्ययन प्रकाशित होने के लिए स्वीकृत हो चुका है।
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