झांसी। जिले में रेमडेसिविर का इंजेक्शन नहीं है। अब ऑक्सीजन का भी अकाल पड़ने लगा है। ऐसे में शासन से रोज 650 इंजेक्शन भेजने की मांग की गई है। साथ ही कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते पांच मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने की भी मांग भेजी है। साथ ही उद्योगों को ऑक्सीजन की सप्लाई न करने के आदेश भी सप्लायर को जारी कर दिए गए हैं।
कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन को काफी कारगर माना गया है। यह एंटी वायरल होता है। अचानक से कोरोना के मामले बढ़ने के कारण इस इंजेक्शन की जबरदस्त किल्लत हो गई है। हाल ये है कि इंजेक्शन को लेकर मारामारी और कालाबाजारी का जबरदस्त दौर चल रहा है। लगभग एक हजार रुपये में बिकने वाला इंजेक्शन मेडिकल स्टोरों ने 23-23 हजार रुपये तक में बेचा गया। जबकि, पिछले चार दिनों से महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को एक भी इंजेक्शन नहीं मिला है। वहीं, शासन ने औषधि प्रशासन विभाग से रेमडेसिविर की जरूरत के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। बृहस्पतिवार को औषधि प्रशासन विभाग ने 650 इंजेक्शन प्रतिदिन उपलब्ध कराने की मांग भेज दी है। अब शुक्रवार को शासन स्तर की टीम का झांसी दौरा करने की संभावना है। यह टीम निजी अस्पतालों और सरकारी चिकित्सालयों में जाकर कोविड के हालातों की समीक्षा करेगी। साथ ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को देगी कि जिले में रोज कितने रेमडेसिविर इंजेक्शन की खपत है। इसके अलावा इन दिनों झांसी में रोज 12 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है, जबकि रोज 15 मीट्रिक टन की जरूरत है। ऐसे में बृहस्पतिवार को औषधि प्रशासन विभाग ने सप्लायरों से उद्योगों को ऑक्सीजन न देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे तीन मीट्रिक टन की कमी पूरी होने की संभावना है। साथ ही कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से आगामी दिनों में रोज 20 मीट्रिक टन की खपत की संभावना जताई गई है।
नर्सिंगहोम और मेडिकल स्टोरों में सांठगांठ
नर्सिंगहोम और मेडिकल स्टोरों में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर जबरदस्त सांठगांठ चल रही है। हाल ये है कि कुछ नर्सिंगहोमों ने खुद अपने कर्मचारी लगा रखे हैं, जो दलाल का काम कर रहे हैं। वह मरीजों को संबंधित मेडिकल स्टोर की जानकारी देकर वहां से इंजेक्शन खरीदकर लाने को कहते हैं। इसमें नर्सिंगहोम और मेडिकल स्टोर का अपना-अपना कमीशन सेट रहता है। आपदा के इस दौर में कमाई के चक्कर में निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर संवेदनहीनता पर उतारू हैं।
जरूरत नहीं फिर भी खौफ दिखाकर मंगाते
कोरोना का नाम सुनते ही लोगों की रुह कांप जाती है। बस लोगों के इसी डर का फायदा रेमडेसिविर की कालाबाजारी में लिप्त सिंडिकेट उठा रहा है। हाल ये है कि मरीज की तबीयत बिगड़ जाने का डर दिखाकर परिजनों से बेवजह भी रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगवाया जा रहा है। जबकि, इसकी जरूरत भी नहीं होती है। बाद में यही इंजेक्शन वापस मेडिकल स्टोर पर चला जाता है। फिर यही तरीका दूसरे मरीज पर इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में एक इंजेक्शन कई परिजनों के हाथों से बार-बार गुजरता हुआ मेडिकल स्टोर पहुंचता रहता है और नोटों की गड्डियां बढ़ती रहती हैं।