झांसी। लॉकडाउन के दौरान खड़ी रहीं बसों का टैक्स माफ करने की आस लगाए बैठे बस मालिकों को सरकार ने राहत नहीं दी है। सरकार ने केवल कर भुगतान में देरी पर लगने वाले जुर्माने को माफ किया है। सरकार के इस फैसले को लेकर बस मालिकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब बसें चलीं ही नहीं, तो उनको नॉन यूज श्रेणी में शामिल कर टैक्स माफ किया जाना चाहिए।
झांसी से करीब 400 से अधिक प्राइवेट बसों का संचालन विभिन्न मार्गों पर होता है। लॉकडाउन के दौरान मार्च से लेकर मई तक वाहन खड़े रहे। इस दौरान बस ऑपेटरों ने कई बार ज्ञापन सौंपकर बसों का टैक्स माफ करने की मांग की थी। पिछले दिनों सरकार ने बसों को सरेंडर करने के लिए कहा था। जिसके बाद अब तक 200 से अधिक बसों का सरेंडर किया जा चुका है। ऑपरेटरों को उम्मीद थी कि सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर बसों का टैक्स माफ करेगी। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने बसों के टैक्स में देरी पर लगने वाले जुर्माने को माफ कर दिया। इसे लेकर बस ऑपरेटरों में खासा आक्रोश है। जिला बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप यादव ने बताया कि इसे लेकर 10 जुलाई को दोपहर एक बजे कार्यालय पर बैठक होगी।
सरकार ने बस ऑपरेटर्स की मांगों को दरकिनार कर दिया। जबकि सरकार ने खुद ही बसों को नॉन यूज श्रेणी में मानकर टैक्स माफी का वादा किया था।- अनूप यादव, अध्यक्ष, बस ऑपरेटर एसोसिएशन
सरकार अगर टैक्स में राहत देती, तो बस मालिकों को काफी सहूलियत होती। बसें तीन महीने से खड़ी हुई हैं। इससे बस मालिकों को नुकसान हुआ है।- मोहम्मद जावेद, बस मालिक
तीन महीने से बसें खड़ी हैं। अब भी बसें कम ही चल रही हैं। टैक्स माफ न होने से बस ऑपरेटरों की दिक्कत बढ़ेगी। इसका विरोध किया जाएगा।- रवि यादव, बस मालिक
बसों का टैक्स माफ करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने केवल जुर्माना माफ किया है। बस ऑपरेटरों की समस्याओं को सरकार को समझना चाहिए।- राजीव अग्रवाल, बस मालिक