झांसी। मनरेगा के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रोजगार सेवकों की मनमानी अब नहीं चलने दी जाएगी। काम से जी चुराने वाले रोजगार सेवकों को हटाकर नए ऊर्जावान लोगों को मौका दिए जाने का निर्णय शासन ने लिया है।
सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड के प्रति सरकार बेहद गंभीर है। सूखाग्रस्त सभी जनपदों में मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए झांसी के 497 गांवों में तैनात 323 रोजगार सेवकों को अधिकारियों ने कड़े निर्देश दिए हैं। इन रोजगार सेवकों के कार्यों पर प्रशासन की पैनी निगाह है।
मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार का कहना है कि कुछ समय पूर्व शिकायतों के चलते 90 रोजगार सेवकों को हटाया गया था, जिससे इन गांवों में रोजगार सेवक नहीं हैं। वर्तमान में कुल 323 रोजगार सेवक ही जनपद में मनरेगा के कार्यों को देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने कार्यों में रुचि न लेने वालों पर कार्रवाई होगी। वहीं, अनियमितताएं बरतने एवं रोजगार उपलब्ध कराने में हीला-हवाली की शिकायत आने पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। सीडीओ ने बताया कि शासन से स्पष्ट आदेश है कि जिस रोजगार सेवक की शिकायत आए, उसकी जांच कराई जाए। यदि शिकायत सही पाई गई तो उसे तत्काल हटा दिया जाए और उसके स्थान पर नए व ऊर्जावान लोगों को नियुक्त कर दिया जाए।
यह हैं रोजगार सेवक के कार्य
रोजगार सेवकों की कार्यप्रणाली में कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। इनमें मनरेगा के तहत मिलने वाले कार्यों के लिए मजदूरों का डिमांड पत्र भरना, डिमांड पत्र को लेकर ब्लॉक कार्यालय में जमा कराना प्रमुख है। साथ ही एमआर (मस्टर रोल) जमा कर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करना और उसका सत्यापन करने की जिम्मेदारी रोजगार सेवक की है। इसके अलावा जॉब कार्ड भरने का काम भी इन्हीं को सौंपा गया है। इसके एवज में शासन द्वारा रोजगार सेवकों को प्रतिमाह 3600 रुपये मानदेय दिया जाता है।