संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मंगलवार को बिसातखाना स्थित मदरसा मस्जिद नवाब में जलसा आयोजित किया गया। जलसे में छात्र-छात्राओं के कुरान मुकम्मल करने पर उपहार देकर सम्मानित किया गया। यह सभी छात्र-छात्राएं शहर के नामी स्कूलों में भी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। जलसे में उलमाओं ने दीन की बारीकियों से रूबरू कराया। सीतापुर से आए मौलाना मीजान अहमद ने नात पढ़कर जलसे का शुभारंभ किया।
जलसे में तकरीर करते हुए इंदौर से आए मुफ्ती उमैर ने कहा कि इस्लाम ही वाहिद मजहब है जिसमें मर्द और औरतों को बराबरी का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा की इल्म ही सबसे बड़ी दौलत है। अपने बच्चों को इल्म देने के लिए हर कोशिश करना हमारा फर्ज है। बच्चों में अगर इल्म की दौलत होगी तो वह कामयाब होंगे। जबलपुर से आए मुफ्ती मेहमूदुल हसन ने कहा की बेहतरीन अखलाक ही इस्लाम की पहचान है। हम सभी अपने अखलाक से दूसरों के दिलों को जीत कर मिसाल पेश करें। दीन का रास्ता हमको कामयाबी की ओर ले जाता है। इसलिए दीन और इस्लाम का दामन थामे रहें। राजस्थान से तशरीफ लाए मुफ्ती अब्दुस सलाम ने कहा की इस्लाम इंसानों की मदद करने का हुक्म देता है। जिसके चलते हम मोमिनों को दूसरों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। मुफ्ती साबिर कासमी ने कहा की आज के दौर के मदरसों में दीनी और दुनियावी तालीम का इंतजाम है। अगर हम बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए नहीं भेज पा रहे हैं तो मदरसों में दाखिला कराएं। इस मौके पर मोहम्मद मुजीब, मौलाना सैफुद्दीन, मौलाना एजाज, कारी हसीब, मुफ्ती खालिद, मुफ्ती सिद्दीक, सैयद ताबिश अली मौजूद रहे। पेश इमाम हाफिज मोहम्मद अख्तर ने आभार व्यक्त किया।
- इन बच्चों ने किया कुरान मुकम्मल
मदरसे में पढ़ने वाले मोहम्मद दानिश, मोहम्मद आयान, मोहम्मद अर्श, मोहम्मद याहया, मोहम्मद उमामा के कुरान-ए-पाक मुकम्मल करने पर उपहार देकर सम्मानित किया। जलसे में कुरान मुकम्मल करने वाले बच्चों के माता पिता को भी शाबाशी दी गई।