झांसी। पुरातत्व विभाग की तमाम बंदिशों के बाद भी संरक्षित पुरातात्विक स्मारक किले और रानी महल के इर्दगिर्द डेढ़ सौ निर्माण हो गए। पुरातत्व विभाग की कार्रवाई सिर्फ नोटिस जारी करने तक ही सिमटी रही। सूचना के बाद भी प्रशासन और पुलिस महकमा अनदेखी करता रहा।
महानगर में स्थित झांसी का ऐतिहासिक किला, रानी महल व झोकनबाग सिमिट्री को केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले रखा है। नियमानुसार संरक्षित स्मारक के 100 मीटर का दायरा प्रतिषिद्ध क्षेत्र होता है, जहां किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है, जबकि 101 से 300 मीटर तक का दायरा विनियमित क्षेत्र होता है, जहां पुरातत्व विभाग की मंजूरी के बाद ही निर्माण किया जा सकता है। निर्माण की वजह से पुरातात्विक धरोहर को किसी तरह का नुकसान न हो तथा दूर से धरोहर को देखा जा सके, जिसके चलते ये नियम बनाया गया है। बावजूद, किसी को इसकी परवाह नहीं है। बगैर किसी मंजूरी के निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी हैं। खासतौर पर रानी महल के इर्दगिर्द प्रतिषिद्ध क्षेत्र होने के बाद भी निर्माण करा लिए गए हैं।
निर्माण कराने वालों को पुरातत्व विभाग की ओर से लगातार नोटिस जारी किए गए हैं। एक साल में विभाग द्वारा डेढ़ सौ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस की कॉपी प्रशासन और पुलिस विभाग के साथ-साथ झांसी विकास प्राधिकरण व नगर निगम को भी भेजी जाती है। बावजूद, कार्रवाई कुछ नहीं होती। यही वजह है कि निर्माण लगातार हो रहे हैं।
निर्माण करने वालों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। पिछले साल लगभग डेढ़ सौ नोटिस जारी किए गए हैं। निर्माण की मंजूरी महज छह लोगों ने ही ली है। - अभिषेक सिंह, सर्वेक्षण सहायक - पुरातत्व विभाग