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Jhansi News: शादी से एक महीने पहले पिता के साथ झांसी आ गईं थीं रानी

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई अपनी शादी के एक महीने पहले पिता के साथ झांसी आ गईं थीं। यहां राजा गंगाधर राव ने उनके ठहरने का शाही प्रबंध किया था। रानी के विवाह के बाद उनके पिता मोरोपंत तांबे झांसी के ही होकर रह गए थे। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने भी अपना बलिदान दिया था।
रानी के पिता मोरोपंत तांबे मराठा शासक पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबारी थी। रानी जब चार वर्ष की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद मोरापंत ने ही रानी का पालन-पोषण किया था। रानी बचपन से ही बहादुर थीं और उन्हें बाल्यकाल से ही घुड़सवारी व तलवार चलाने का शौक था। उनके पिता पेशवा के यहां सामान्य से दरबारी थे, लेकिन रानी की बहादुरी के किस्से सुनकर झांसी के राजा गंगाधर राव की ओर से विवाह का प्रस्ताव उनके पिता के पास भेजा गया था। इस प्रस्ताव पर उन्होंने खुशी-खुशी हामी भर दी थी। शादी की तारीख 19 मई 1842 तय हुई थी। इसके एक महीने पहले रानी अपने पिता के साथ बिठूर से झांसी आ गईं थीं। यहां गणेश मंदिर के पास दुर्गाबाई के बाड़े में उनके रुकने का बंदोबस्त राजा की ओर से किया गया था। राजा की ओर से बड़ी संख्या में नौकर-चाकर रानी की सेवा में लगा दिए गए थे। दुर्गाबाई का बाड़ा एक तरह से रानी का मायका बन गया था। घर में होने वाली विवाह की कई रस्में भी इसी बाड़े में पूरी हुईं थीं। रानी के अन्य परिजन भी यहीं ठहरे थे। रानी की शादी के बाद उनके पिता यहीं के होकर रह गए थे। राजा गंगाधर राव ने उन्हें रहने के लिए एक हवेली दे दी थी।
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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रानी के पिता ने भी हिस्सा लिया था। युद्ध में उनका एक पैर कट गया था। घायलावस्था में दतिया पहुंचे थे। दतिया में अंग्रेजी सेना ने गिरफ्तार कर उन्हें फांसी पर लटका दिया था।
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