ढिकौली गांव में होरहा खरगोश पालन। अमर उजाला
झांसी। बबीना थाना क्षेत्र के ढिकौली गांव में रहने वाले रामप्रताप पाल खरगोश पालन का काम शुरू कर आत्मनिर्भर बन गए हैं। शुरुआत में वे साठ जोड़े खरगोश लेकर आए थे, जो अब चार सौ हो गए हैं। लोग भी उनके यहां से खरगोश पालने के लिए ले जा रहे हैं। इससे उनकी एक अच्छी आय होने लगी है। वे अब आत्मनिर्भर जिंदगी जीने लगे हैं। परेशानी की जिंदगी जी रहा परिवार भी खुश है।
वैसे रामप्रताप के पास दो बीघा जमीन है। उनके लिए कम जमीन में बच्चों के साथ जीवन यापन करना बड़ा मुश्किल हो रहा था। लॉकडाउन के ठीक पहले वे फरवरी में हरियाणा के टिकरी बॉर्डर पर मौजूद एक खरगोश पालने की फर्म में प्रशिक्षण लेने गए थे। एक महीने का प्रशिक्षण लेकर वे गांव लौट आए। साथ में साठ जोड़ी खरगोश भी ले आए। लॉकडाउन के दौरान ही उन्होंने एक हजार वर्ग फीट में एक शेड का फार्म हाउस बनाया।
इसमें पिंजरे बनवाकर रखे और उसमें खरगोशों को पालना शुरू कर दिया। एक पिंजरे में दस खरगोशों को रखा जाता है। वर्तमान में उनके पास चार सौ खरगोश हो गए हैं। लोग भी उनके यहां से खरगोश पालने के लिए ले जाने लगे हैं। वे छोटे खरगोश का जोड़ा एक हजार रुपये व बड़ों का दो से ढाई हजार रुपये में बेच रहे हैं। इससे उनकी एक अच्छी आय होने लगी है। उनको उम्मीद है कि वे काम को जल्दी ही और बढ़ा लेंगे। इस काम से वे अब एक आत्मनिर्भर जिंदगी जीने लगे हैं। परेशानी की जिंदगी जी रहा परिवार की भी खुश है।
आत्मनिर्भर बनने के लिए यह एक अच्छा व्यापार है। मैंने ये काम छोटी सी पूंजी में शुरू किया था। प्रतिदिन लोग उनके यहां खरगोश खरीदने आ रहे हैं।
रामप्रताप पाल।
मुझे खरगोश घर में पालने का बड़ा शौक है। मुझे पता लगा कि ढिकौली गांव में खरगोश मिल जाएंगे। इसलिए यहां तक आ गया।
जहांगीर खान, सीपरी बाजार।
मेरे बच्चों को खरगोश बहुत अच्छे लगते हैं। उनकी खुशी के लिए खरगोश लेकर जा रहा हूं। अब बच्चे उनके साथ खूब खेलेंगे।
नितिन अग्रवाल, प्रेमनगर।
खरगोश बेहद सीधा और छोटा जानवर होता है। इनके साथ बच्चे खेलते हैं तो वे सुरक्षित रहते हैं। इसलिए खरगोश खरीदने आया हूं।
शशिकांत वर्मा, प्रेमनगर।