ओरछा। ओरछा में निकाली गई भगवान श्रीरामराजा की बरात ने बुंदेली राजसी वैभव की याद ताजा कर दी। निशान, छत्र, मशाल के साथ दूल्हा सरकार की पालकी के साथ रमतूला वादक चल रहे थे। वैसे तो आधुनिक गाजे-बाजे और विद्युत छटा का भी कोई जोड़ नहीं था पर पुरातन परंपराओं व संस्कृति का अपनी जगह पूरी तरह से पालन किया गया। मंदिर के प्रधान पुजारी श्री रमाकांत शरण महाराज व पुरोहित वीरेंद्र कुमार विदुआ ने वैदिक विधान से पूजन कर दूल्हा सरकार को उनके भाई लक्ष्मण जी के विग्रह सहित पालकी में विराजमान कराया। शाम साढ़े छह बजे सिर पर स्वर्ण जड़ित मुकुट के ऊपर खजूर के पत्तों का मौर रखकर जैसे ही दूल्हा सरकार पालकी में बैठकर बाहर निकले तो ढोल नगाड़ों तासों के साथ रमतूला और तुरही की आवाजों से मंदिर परिसर गूंज उठा। मध्यप्रदेश पुलिस की ओर से रामराजा सरकार को सशस्त्र सलामी दी गई। इसके बाद वरयात्रा नगर भ्रमण के लिए निकली। बरात को देखकर हर बुंदेलखंडवासी के मुंह से एक ही बात निकल रही थी, दूल्हा बन सीता को ब्याहन निकले राजाराम जू, देखत छटा बनत है नौनी नगर ओरछा धाम की।
बरात में डीजे और बैंडों की भी भरमार रही। भजनों की धुनों पर हजारों की संख्या में युवा थिरकते दिखाई दिए। सभी के सिर पर बरातियों वाली पगड़ी थी तथा कई लोगों ने बुंदेली राजसी वस्त्र पहन रखे थे। बरात में देवता और भूत प्रेत के स्वरूप भी चल रहे थे जो बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। सबसे आगे घोड़े चल रहे थे जो द्वार-द्वार पर अश्व नृत्य कर रहे थे। आतिशबाजी से आसमान गूंज रहा था। धार्मिक नगरी ओरछा दुल्हन की तरह सजाई गई थी। रामराजा मंदिर व जानकी जी मंदिर विशेष पुष्प सज्जा व विद्युत छटा से जगमगा रहा था। नगर के मुख्य मार्गों पर तोरण द्वार तथा पूरे नगर में केसरिया ध्वज लगाए गए थे। हर द्वार पर वंदनवार व कलश रखकर दीपक जलाए गए। भगवान की बरात जैसे ही नगर में प्रवेश की तो लोग हाथों में आरती और पुष्पमालाएं लेकर इंतजार कर रहे थे कि कब दूल्हा सरकार उनके दरवाजे पर पधारें और वे उनका तिलक कर आरती उतारकर कर पुष्प माला अर्पित करें। बरात के साथ दूल्हा सरकार के घराती के रूप में मंदिर व्यवस्थापक तहसीलदार संदीप शर्मा साफा बांधकर पालकी के साथ चल रहे थे। राजस्व निरीक्षक द्वारा हर घर के द्वार पर तिलक के बाद भगवान को व्यवहार के रूप में लिखाई जाने वाली धनराशि लिखे रहे थे, क्योंकि ओरछा के लोगों का रामराजा सरकार से राजा और प्रजा का नाता है।
देर रात तक भ्रमण करने के बाद वर यात्रा मुख्य चौराहे के पास स्थित जानकी जी मंदिर पर पहुंची जहां पर जनकपुरी के पुजारी हरीश दुबे ने रामराजा सरकार का तिलक कर बारात की अगवानी की । इस तरह रामराजा सरकार की द्वारचार की रस्म पूरी हुई। इसके बाद रात में पाणिग्रहण संस्कार हुआ। रामराजा मंदिर प्रांगण में सीता स्वयंवर की लीला चलती रही। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने लीला का आनंद लिया। मेला ग्राउंड में विशाल मेला लगाया गया है, जो तीन दिन तक चलेगा।
देश का इकलौता मंदिर जहां भगवान को पूजा जाता है राजा के रूप में
ओरछा का इकलौता मंदिर है जहां पर भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है। इसी कारण बरात के शुरूआत में जहां एमपी पुलिस के द्वारा गार्ड आफ ऑनर दिया जाता है तो वहीं भ्रमण के दौरान हर घर के द्वार पर तिलक करने वाले श्रद्धालुओं को राजशाही परंपरा के अनुसार बीड़ा (पान) और इत्र की काढ़ी प्रसाद के रूप में दी जाती है।
हरे बांस मंडप छाए सिया जू खौं राम ब्याहन आए.....
बुंदेलखंड के दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाएं दूल्हा सरकार की एक झलक पाने को उत्सुक दिखीं। महिलाएं बुंदेली वैवाहिक मंगल गीत, हरे बांस मंडप छाए, सिया जी खौं राम ब्याहन आए। इन गलियन होकैं ल्याइयौ री रघुनाथ बना खौं, जैसे पारंपरिक बुंदेली गीत गा रहीं थीं।
विदेशी पर्यटक भी झूमे रामबरात में
ओरछा में होने वाले इस भव्य विवाह उत्सव में सात समुंदर पार से आए मेहमानों ने भी खूब आनंद लिया। विदेशी मेहमानों बुंदेली विवाह गीतों के खूब वीडियो बनाए तथा राम जी की बारात में झूमकर नाचे । रात के समय मंदिर के अंदर पूरे बुंदेलखंड से आईं कीर्तन मंडलियों के बीच प्रतियोगिता चलती रहीं, सुबह के समय इन्हें मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रसाद व नकद विदाई दी गई।
आज होगा रामकलेवा
श्रीराम विवाह के दूसरे दिन 29 नवंबर को रामराजा मंदिर के अंदर रामकलेवा होगा, इसमें बुंदेलखंड के विभिन्न अंचलों से आने वाले लोक गायक कलेवा गीत पेश करेंगे। इसमें जनकपुर की सखियों का भाव रखकर गीतों के माध्यम से दूल्हा सरकार से हंसी ठिठोली की जाएगी।