मेडिकल स्टूडेंट की खुदकुशी पर जातिवाद का मुद्दा उठा
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में छात्र की आत्महत्या के बाद जातिवाद का मुद्दा उठने पर शिक्षक और छात्र दो फाड़ हो गए हैं। एक धड़ा मृतक के परिजन के साथ है, तो दूसरा कॉलेज प्रशासन के साथ। शुक्रवार को प्राचार्य कार्यालय में हुई बैठक में शिक्षकों के दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी। कुछ ने जातिवाद के मुद्दे को तूल दिया, तो कई ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
बृहस्पतिवार को तड़के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अश्वनी कुमार ने हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। शुक्रवार को अश्वनी के बड़े भाई मनोज कुमार झांसी आए। उनका आरोप है कि अश्वनी का जाति के नाम पर उत्पीड़न किया जाता था। इससे क्षुब्ध होकर उसने आत्महत्या कर ली। मनोज का यह भी कहना है कि इसकी शिकायत उन्होंने कालेज प्रशासन से नहीं की थी। इस मामले में शुक्रवार को कॉलेज प्राचार्य डॉ.एनएस सेंगर ने अपने कार्यालय में बैठक बुलाई। इसमें सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य और कॉलेज के शिक्षक मौजूद रहे। बैठक में कुछ शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कॉलेज में छात्र की जाति पूछकर नंबर दिया जाते हैं। इस मामले में कुछ छात्र और शिक्षक भी इनके साथ दिखे पर खुलकर न तो सामने आए और न ही बैठक में ही मौजूद रहे। शिक्षक की जाति आधारित तर्क पर प्राचार्य ने बैठक में उपस्थित अन्य शिक्षकों से जवाब मांगा, तो सभी ने सिरे से आरोप को खारिज कर दिया। प्राचार्य ने भी कहा कि जाति तो दूर कॉलेज में धर्म के आधार पर भी किसी का उत्पीड़न अब तक नहीं किया गया है। बैठक में काफी गहमागहमी का माहौल रहा। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि जातिवाद के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
रजिस्टर में समस्याएं लिख प्राचार्य को बताएंगे
छात्र की आत्महत्या की घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने वार्डन और असिस्टेंट की भूमिका बढ़ा दी है। प्राचार्य ने सभी को निर्देश दिए कि वार्डन, असिस्टेंट न सिर्फ सप्ताह में एक दिन निरीक्षण करें बल्कि रजिस्टर भी बनाएं। उसमें निरीक्षण में मिली कमियां और छात्रों की समस्याओं का उल्लेख करें। इसकी जानकारी प्राचार्य को भी दी जाएगी।
हाई रिस्क वाले छात्र चिह्नित होंगे
कॉलेज प्रशासन ने तय किया है कि हॉस्टल में रह रहे हाई रिस्क वाले छात्रों को चिह्नित किया जाएगा। हाई रिस्क में उन छात्रों को रखा जाएगा जिनके परिवार में किसी परिजन की मृत्यु हो चुकी है या फिर मां-बाप में पारिवारिक विवाद चल रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि पारिवारिक समस्याओं से छात्र तनाव में आ जाते हैं। इनके चयन के बाद शिक्षक लगातार छात्र के संपर्क में रहकर दुख व समस्याओं से उबारने की कोशिश करेंगे।