अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लगातार बारिश होने से मूंगफली और मक्का की फसलों पर खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि ये फसलें लगभग सौ दिनों की होती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी बोआई 15 जुलाई तक हो जानी चाहिए वरना रबी की फसलों की बोआई में देरी हो सकती है।
झांसी में खरीफ सीजन में मूंगफली, उड़द, तिल, ज्वार, बाजरा और मक्का आदि फसलों की बोआई की जाती है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि उड़द की फसल 70 दिन की होती है। 25 जुलाई से पांच अगस्त तक इसकी बोआई होती है। वहीं, तिल की फसल 85 से 90 दिन की होती है। इसकी 25 जुलाई से पहले बोआई हो जानी चाहिए।
बाजरे की बोआई अगस्त के प्रथम सप्ताह तक होती है। ये 70-80 दिन की फसल है। ऐसे में लगातार बारिश से इन फसलों की बोआई पर ज्यादा असर पड़ने के आसार नहीं हैं मगर 90 से सौ दिन में तैयार होने वाली मक्का और 100 दिन वाली मूंगफली की फसल की बोआई प्रभावित हो सकती है, क्योंकि मूंगफली की 15 जुलाई तक और मक्का की 25 जुलाई तक बोआई हो जानी चाहिए, ताकि इन फसलों की कटाई 15 अक्तूबर से पहले हो जाए। फिर खेत तैयार करके अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से 15 नवंबर तक रबी की फसलों की बोआई की जा सके। कहा कि अभी भी बारिश थम जाए तो भी बोआई संभव है।
प्रदेश में मूंगफली की सर्वाधिक बोआई बुंदेलखंड में होती
पिछले साल प्रदेश में 3.41 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बोआई हुई थी। इसमें अकेले बुंदेलखंड में ही लगभग तीन लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बोआई की गई। झांसी में 1.68 लाख हेक्टेयर, महोबा में 82 हजार हेक्टेयर, ललितपुर में 23 हजार हेक्टेयर, हमीरपुर में 20 हजार हेक्टेयर और जालौन में साढ़े पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मूंगफली बोई गई। प्रदेश में 88 फीसदी मूंगफली की बोआई बुंदेलखंड में ही हुई।