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रेलवे के पास नहीं था पैसा, फिर भी टिकट निरस्त कराने वालों को दे दिया न्योता

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रेलवे के पास नकदी का इंतजाम न होने के कारण मंगलवार को टिकट निरस्त कराने पहुंचे लोगों को किराया वापसी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। जो टिकट बन रहे थे उससे होने वाली आय से ही किराया वापस किया गया। चूंकि, टिकट बनवाने वाले यात्रियों की संख्या बेहद कम थी, इस कारण अधिकांश लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। वे रेलवे की व्यवस्था को कोसते रहे। कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद कर रखा है। लॉकडाउन में दूसरे शहरों में फंसे लोगों को राहत देने के लिए 12 मई से स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया, जो अब 30 जून तक जारी रहेगा। वहीं, 25 मई से रेलवे ने 23 मार्च से 30 जून के बीच बनवाए गए टिकटों का निरस्तीकरण शुरू कर दिया है। 25 मई को ईद के कारण बहुत कम संख्या में लोग टिकट निरस्त कराने पहुंचे। लेकिन मंगलवार से रेलवे आरक्षण कार्यालय में टिकट निरस्त कराने वालों की भीड़ लगना शुरू हो गई है। मगर जो टिकट बन रहे हैं उससे होने वाली आय से ही किराया वापसी की जा रही है। इस कारण किराया वापसी लेने वाले लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। जो लोगों सुबह के वक्त पहुंचे, वे दोपहर तक टिकट निरस्त कराने का इंतजार करते रहे। बाद में आरक्षण कर्मचारियों ने लोगों से कह दिया कि वे या तो कल आए या शाम तक प्रयास कर लें। टिकट निरस्त न होने पर दूरदराज से आए लोगों को गर्मी में परेशान होना पड़ा।   मुझे पत्नी व बच्चे के साथ व्यास जाना था। फरवरी में ही 26 मई का टिकट बनवा लिया था। आज सुबह 8.30 बजे टिकट निरस्त कराने आया, लेकिन काउंटर पर वापसी के लिए पैसा न होने के कारण तीन घंटे से बैठा हूं। मनोज कुशवाहा, खुशीपुरा। मुझे परिवार के साथ शादी में 18 अप्रैल को सीवान जाना था। लॉकडाउन के कारण नहीं जा सका। आज टिकट निरस्त कराने आया था, लेकिन पैसा न होने के कारण आरक्षण कर्मचारियों ने कल बुलाया है। विकास गिरी, बड़ा पुल पाल कॉलोनी। मैंने एक टिकट सतना जाने के लिए 15 अप्रैल और मुंबई के लिए एक मई का बनवा रखा था। आने- जाने के चार टिकट निरस्त कराने हैं। चार घंटे इस उम्मीद से बैठा हूं कि काउंटर पर पैसा आएगा तो किराया वापस मिल जाएगा। लद्दाराम, तलैया। मैंने 23 मार्च का अयोध्या जाने के लिए टिकट बनवाया था। मुझे नहीं मालूम था कि टिकट निरस्त कराने में इतनी परेशानी होगी। अन्यथा मैं आज स्टेशन पर आता ही नहीं। रेलवे यात्रियों के साथ मजाक कर रही है। आरपी खरे, पठौरिया। शादी में वडनेरा जाने के लिए तीन टिकट बनवाए थे। शादी में तो नहीं जा सके, लेकिन अब टिकट निरस्त कराने के लिए जरूर परेशान होना पड़ रहा है। रेलवे को पहले से पैसों का इंतजाम करना चाहिए था। अनिकेत सिंह, खातीबाबा। मुझे ग्रुप में 24 मई को झेलम एक्सप्रेस से वैष्णो देवी दर्शन करने जाना था। 2500 रुपये टिकट निरस्त कराकर वापस लेना है। दो घंटे से इंतजार कर रहा हूं। उम्मीद नहीं है कि आज पैसा वापस मिल जाएगा। मोहन वर्मा, हंसारी।
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