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रेलवे यूनियन मान्यता चुनाव में 16417 कर्मचारी करेंगे मतदान

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झांसी। रेलवे यूनियन मान्यता चुनाव की तारीखों की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर मंडल रेल प्रशासन ने मतदाता कर्मचारियों की अंतिम सूची जारी कर दी है। मंडल में 16417 कर्मचारी अपने मत का प्रयोग करेंगे। वैगन, कोच और सिथौली कारखाने की अभी सूची जारी होना बाकी है।
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रेलवे अपने कर्मचारी संगठनों को मान्यता देने के लिए हर छह साल में चुनाव कराता है। पिछली बार 2013 में 25, 26 और 27 अप्रैल को चुनाव हुए थे। नीति के हिसाब से मान्यता प्राप्त संगठनों का कार्यकाल अप्रैल 2018 में पूरा हो गया था और उक्त तिथियों के हिसाब से ही चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन पहले लोकसभा चुनाव और फिर कोरोना महामारी के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। मगर अब दोबारा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई है। बोर्ड ने सभी मंडलों को कर्मचारियों की संशोधित मतदाता सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश के तहत मंडल रेल प्रशासन ने सूची तैयार कर ली है। इसमें डीआरएम के अधीन 15594, डिप्टी एफए एंड सीएओ कार्यालय के 13, डिप्टी सीईई कार्यालय के16, डिप्टी सीई कार्यालय के 62, डिप्टी सीएसटीई कार्यालय के 50, आरई आर्गनाइजेशन कार्यालय के 278, एसएसई टीएमडी कार्यालय के 33, एसएमएम डीजल कार्यालय के 237, एसएमएम कार्यालय के 29 व ब्रिज कार्यालय के 77 कर्मचारी अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे।
नया श्रम कानून कुछ और कहता है
मोदी सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव कर दिया है। अभी तक मजदूरों व कर्मचारियों की विभिन्न आवश्यकताओं के लिए 44 कानून थे, लेकिन अब इनका चार कोड में परिवर्तन कर दिया गया है। औद्योगिक संबंधित कोड 120 के अंतर्गत उसी संगठन को मान्यता मिल सकती है, जिसके पास 51 फीसदी सदस्यता है। ज्यादातर विभागों में एक ही यूनियन काम कर रही है। लेकिन रेलवे में ऐसा नहीं है। यहां वर्तमान में दो यूनियनों को मान्यता है। रेलवे के कई और संगठनों को भी चुनाव लड़ने का अधिकार है। ऐसे में नए श्रम कानून को लागू किया जाएगा या मतदान के जरिये चुनाव होगा, अभी इस स्थिति को साफ नहीं किया गया है।
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2007 से शुरू हुई थी चुनाव की परंपरा
रेलवे में शुरूआत से ही नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे व ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन से जुड़ी यूनियन को ही मान्यता मिलती आ रही है। इस नीति के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस समय रेल मंत्री नीतिश कुमार थे। मद्रास हाईकोर्ट ने रेलवे से पूछा था कि अभी किस तरह मान्यता दी जाती है तो बताया गया कि सदस्यता के आधार पर। यूनियनों से सदस्यता पूछी गई तो किसी ने 12 लाख तो किसी ने 16 लाख बताई। छोटे संगठनों ने भी अपनी सदस्यता के बारे में बताया। उस समय रेलवे में 16 लाख कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन सदस्यता 32 लाख से ज्यादा हो रही थी। एक कर्मचारी दो- दो जगह सदस्य था। मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं होने पर भारतीय मजदूर संघ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पक्षों को सुनने के बाद 2005 में चुनाव के जरिये मान्यता देने का निर्णय सुनाया। रेलवे ने चुनाव की तैयारी शुरू की। इसके बाद 2007 में पहली बार यूनियन मान्यता के लिए चुनाव कराए गए।
यह मिलती हैं सुविधाएं
रेलवे की तरफ से मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को कार्ड पास जारी किए जाते हैं। इनकी मदद से पदाधिकारी मंडल के किसी भी स्टेशन के लिए मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। साथ ही हर तीन महीने में प्रबंध तंत्र की बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं को रखने का मौका मिलता है। धरना- प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंप सकते हैं। किसी भी अधिकारी से सीधा मुलाकात कर सकते हैं। संगठन की मासिक बैठक के लिए स्पेशल अवकाश मिलता है।
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