मथुरा से बीना के बीच डलने वाली तीसरी रेल लाइन (थर्ड ट्रैक) परियोजना में झांसी से ललितपुर के बीच अधिकांश जमीन को समतल कर लिया गया है। इस काम को रेलवे का निर्माण संगठन पूरा कर रहा है। संबंधित अफसरों के अनुसार फरवरी से तीसरी रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। दरों के बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
अगस्त 2016 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने मथुरा से झांसी के बीच 273.80 किलोमीटर और झांसी से बीना के बीच 152.57 किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन को मंजूरी दी थी। तीसरी नई रेल लाइन बिछाने में मथुरा-झांसी के बीच 4,377 करोड़ और झांसी-बीना के मध्य 2,274 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें रेल विकास निगम लिमिटेड मथुरा से झांसी के बीच, झांसी से ललितपुर के बीच रेलवे का निर्माण संगठन और ललितपुर और बीना के बीच इंजीनियरिंग विभाग को नया ट्रैक डालना है।
साथ ही झांसी-बीना के मध्य तीसरी रेल लाइन का काम पांच चरणों में पूरा होगा। यह काम बीना से धौर्रा, धौर्रा से ललितपुर, ललितपुर से दैलवारा, दैलवारा से बबीना और बबीना से झांसी के बीच बांटा गया है। इन दिनों झांसी से तालबेहट के बीच पेड़ काटने और जमीन को समतल करने का काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्य इंजीनियर डीके पांडे ने बताया कि फरवरी से लाइन डालने का काम शुरू हो जाएगा।
मालूम हो कि, मथुरा-झांसी-बीना के बीच तीसरी रेल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की गति बढ़ेगी। सफर का समय बचेगा और ट्रेनों की लेटलतीफी पर अंकुश लगेगा। इसके बाद कुछ और नई ट्रेनों को भी चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
17 साल में बढ़ीं 55 गाड़ियां
झांसी रेल मंडल की दो लाइनों पर लगातार यात्री, मालगाड़ियों की संख्या और संचालन बढ़ने से लोड बढ़ गया है। इस कारण आए दिन रेल ट्रैफिक बाधित हो जाता है। महत्वपूर्ण ट्रेनों को रास्ता देने के लिए कुछ ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है या फिर उन्हें रोकना पड़ता है। पिछले 16 साल के भीतर झांसी रेल मंडल में 46 प्रतिशत गाड़ियों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में झांसी-बीना बाइस प्रतिशत और आगरा-झांसी सेक्शन में बारह फीसदी ओवर ट्रैफिक है। अब तीसरी लाइन बिछने के बाद समस्या का समाधान किसी हद तक हो जाएगा।
अभी ये समस्याएं
- मथुरा-झांसी-बीना लाइन पर मथुरा से झांसी के मध्य 12 प्रतिशत और झांसी बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक (ओवरलोड) है।
-आए दिन ट्रेनें लेट हो जाती हैं, क्योंकि लोड अधिक होने के कारण प्रमुख ट्रेनों को पहले रास्ता देना जरूरी होता है।
- लोड के कारण कई बार ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। प्रतिकूल मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है।
- इन रूटों पर लोड को देखते हुए नई ट्रेनों की जरूरत है। लेकिन दो पटरियां अब और बोझ सह सकने में अक्षम हैं।
- पटरियों की मरम्मत करने के लिए अक्सर ट्रेनों का संचालन लेकर बंद करना पड़ता है। इसके लिए कभी-कभी लंबे समय के लिए ब्लाक लेना पड़ता है।
अब मिलेगी राहत
- इस रूट पर नई ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
- मालगाड़ियों के लिए एक बिल्कुल अलग लाइन हो जाएगी।
- नई ट्रेनों के चलने पर यात्रियों के लिए आरक्षण कोटा बढ़ जाएगा
- मालगाड़ियों का समय पालन सुधरने पर माल समय पर पहुंचेगा।
- दुर्घटना पर तीसरी रेल लाइन विकल्प के रूप में काम कर सकेगी।
यह भी जानिए
बीना और झांसी के बीच 152.57 किलोमीटर तीसरी रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। इस योजना के लिए स्वीकृत बजट 2,274 करोड़ में अभी तक 489 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।