उत्तर मध्य रेलवे में इंडियन रेलवे वर्क्स कान्ट्रेक्ट सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस सिस्टम के तहत अब टेंडर प्रक्रिया के साथ ही एग्रीमेंट व हस्ताक्षर भी ऑनलाइन होंगे। प्रगति की निगरानी भी ऑनलाइन होगी। अभी टेंडर आमंत्रित और निष्पादित करने की प्रक्रिया पहले से ही ऑनलाइन हैं और अब इंडियन रेलवे वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईआरडब्लूसीएमएस ) को भी झांसी, प्रयागराज व आगरा पर लागू कर दिया गया है। इसके तहत ऐग्रीमेंट पर ऑनलाइन हस्ताक्षर करने, कार्य की प्रगति की निगरानी, मापन आदि ऑनलाइन होने से दक्षता, पारदर्शिता और सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक दूरी के मानकों का पालन संभव होगा। साथ ही ई ऑफिस तीनों मंडलों डिवीजनों और मुख्यालय में लागू कर दिया गया है। रेलनेट के बिना ई.ऑफिस का उपयोग करने के लिए कर्मचारियों को वीपीएन कनेक्शन प्रदान किया गया है और वे घर से काम करते हुए ई.ऑफिस एप्लिकेशन को चलाने के लिए किसी भी इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग कर सकते हैं। 770 किलोमीटर पटरियों की जांच रेलवे में ट्रैक से संबंधित अनुरक्षण कार्यो को करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग द्वारा अक्सर ब्लॉक लिए जाते हैं, जिससे यात्री गाड़ियों का संचालन प्रभावित होता है । परंतु लॉकडाउन के दौरान यात्री गाड़ियों का संचालन ना होने से इंजीनियरिंग विभाग ट्रैक का और भी बेहतर उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है । इस दौरान इंजीनियरिंग विभाग द्वारा कई कार्यों को पूरा किया जा चुका है, जिसमें मुख्य रूप से मंडल में 107.85 किमी के ट्रैक पर ब्लास्ट क्लीनिंग मशीन द्वारा ट्रैक मेंटेनेंस किया जा चुका है। ट्रैक के संरक्षा को ध्यान में रखते हुए अल्ट्रासोनिक फ्ला डिटेक्शन तकनीक द्वारा पटरियों की जांच की जा रही है। अब तक 770.52 किमी ट्रैक की जांच की जा चुकी है। मंडल में 103 ब्रिज का नियमित तकनीकी परीक्षण किया जा चुका है इसके अलावा मंडल में रेल पटरियों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए पटरियों के नीचे गिट्टी को पैक (या टैंप) करने के लिए 346.35 किलोमीटर के ट्रैक की तथा 179 टर्नआउट की टैम्पिंग की जा चुकी है ।