झांसी। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई से लेकर आजादी तक का गवाह झांसी रेलवे स्टेशन एक जनवरी को अपने 132 साल पूरे कर लेगा। इसकी स्थापना एक जनवरी 1889 को हुई थी। ग्रेट इंडियन पेनिनसुलर रेलवे ने इसको स्थापित किया था। शुरुआत में भाप के इंजन से इक्का दुक्का ट्रेनें ही चलती थीं। आज यह स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में शुमार है। कोरोना काल से पहले यहां से प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक ट्रेनें गुजरती थीं।
मिलिट्री सिविल प्रशासन ने जुलाई 1886 में इस स्थान का अंतिम रूप से चयन कर भूमि अधिग्रहण की थी। सबसे पहले अप और डाउन पैसेंजर प्लेटफार्म एक, प्रतीक्षालय, पहूज बांध, अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आवास का निर्माण हुआ। इसके बाद झांसी स्टेशन का उद्घाटन एक जनवरी 1889 को हुआ। इंडियन मिडलैंड रेलवे, जिसका मुख्यालय झांसी था। इसके द्वारा झांसी से कानपुर व ग्वालियर तक लाइन डलवाई गई। सन् 1878 से 1881 के मध्य ग्वालियर आगरा खंड का निर्माण सिंधिया स्टेट ने किया। साल 1885 में आगरा- मथुरा रेलखंड, 1889 में झांसी मऊरानीपुर, मऊरानीपुर बांदा, बांदा- मानिकपुर खंड का निर्माण कार्य इंडियन मिडलैंड रेलवे ने किया। झांसी रेल मंडल का विस्तार पहले तुगलकाबाद से इटारसी तक था। इसी के एक हिस्से को लेकर 1985 में भोपाल मंडल बनाया गया। आज पूरे देश को उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जोड़ने की वजह से झांसी एक महत्वपूर्ण स्टेशन बन चुका है।
मंडल के प्रमुख स्टेशन
मंडल के कुल 158 स्टेशनों में ग्वालियर, झांसी, खजुराहो, उरई, ललितपुर, बांदा, दतिया, मुरैना, भीमसेन, पुखरायां, मऊरानीपुर, महोबा, चित्रकूटधाम स्टेशन प्रमुख हैं।
ये सुविधाएं मौजूद
झांसी स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए आठ प्लेटफार्म, बुकिंग और आरक्षण कार्यालय, पांच प्रतीक्षालय, दो एस्केलेटर, लिफ्ट, वीआईपी लाउंज, भोजनालय, खानपान स्टॉल, वाटर वेंडिंग मशीन, ऑटोेमेटिकट टिकट वेंडिंग मशीन, व्हील चेयर, तीन फुट ओवरब्रिज मौजूद हैं।
झांसी की जगह महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर हो स्टेशन
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर झांसी रेलवे स्टेशन का नाम रखने की मांग उठ रही है। पूर्व राज्यसभा सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर झांसी स्टेशन का नाम वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई और हबीबगंज स्टेशन का अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है।