झांसी। रेल मंडल प्रशासन आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं है। इसका आकलन इसी बात से किया जा सकता है कि मंडल मुख्यालय में आपदा प्रबंधन के लिए एक कक्ष तक अलग से नहीं बना है। मंडल नियंत्रण कार्यालय से ही इसे संचालित किया जा रहा है। जबकि, इसके लिए रेलवे बोर्ड द्वारा निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।
कोरोना महामारी के दिनों को छोड़ दिया जाए तो आमतौर पर प्रतिदिन दो सौ से अधिक गाड़ियां पटरियों पर दौड़तीं हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। आपदा स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए रेलवे प्रशासन हर साल लाखों रुपये खर्च करता है। बी केबिन के पास बने एसटीसी सेंटर पर एनएनटी, सीएंडडब्लू, पीडब्लूआई टेलीफोन, परिचालन के सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण में जोन के तीनों मंडलों के सुपरवाइजर भाग लेते हैं। प्रशिक्षण के दौरान सिखाया जाता है कि वह ट्रेनों के टकराने, रेलवे पुल से ट्रेन के गिने, आग लगने आदि गंभीर घटनाओं पर किसी तरह का कम करें।
बोर्ड ने प्रत्येक मंडल को आधुनिक कम्युनिकेशन से सुसज्जित आपदा प्रबंधन कक्ष बनाने के निर्देश दे रखे हैं। आगरा व प्रयागराज में ये कक्ष संचालित हैं। झांसी रेल मंडल में कुछ साल पूर्व आपदा प्रबंधन कक्ष के उपकरणों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कक्ष न होने के कारण इधर- उधर हो गए। आपदा प्रबंधन के नाम से संचालित फोन अवश्य मंडल कंट्रोल रूम में काम कर रहा है। अन्य व्यवस्थाओं के लिए अधिकारी उदासीन हैं। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मंडल कंट्रोल रूम में आपदा प्रबंधन कक्ष का संचालन किया जा रहा है।