लॉकडाउन खत्म होने के बाद जैसे ही ट्रेनें चलेंगी, दूसरे शहरों में फंसे यात्रियों में नौकरी और अपने घर वापस आने के लिए आपाधापी रहेगी। ऐसे स्थिति में ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को संभालने व अप्रिय घटनाओं को बचाने के लिए रेलवे ने ब्लू प्रिंट (सुरक्षा प्लान) तैयार कर लिया है। जरूरत पड़ने पर दूसरे फोर्स भी मांगे जा सकते हैं। ट्रेनें चलने के पूर्व इसके लिए रिहर्सल की जाएगी। कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन बंद चल रहा है। लॉकडाउन के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू करना रेलवे के लिए एक चुनौती होगा। ट्रेनें चलने पर यकायक भीड़ बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। आशंका है जो लोग दूसरे शहरों में फंसे हैं, वे तुरंत ही ट्रेन पकड़कर अपने घर लौटना चाहेंगे। ट्रेनों में भीड़ बढ़ने पर अप्रिय घटनाएं भी हो सकतीं हैं। कोरोना वायरस का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे हालातों को संभालने के लिए रेलवे ने ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। हर कोच में एक सिपाही की तैनाती होगी। इससे यात्रियों के बराबर निगरानी हो सकेगी। यात्रियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा। जनरल कोचों में भी भीड़ नहीं बढ़ने दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह से फोर्स मांगा जाएगा। इस संबंध में आरपीएफ कमांडेंट उमाकांत तिवारी ने बताया कि ट्रेनों के संचालन के वक्त के लिए सुरक्षा खाका तैयार किया जा रहा है। जैसी स्थिति बनेगी उसी हिसाब से निर्णय लिए जाएंगे। यह भी जानिए ------------- - झांसी से प्रतिदिन 150 सवारी गाड़ियां निकलतीं हैं। - पांच हजार आरक्षित व 20 हजार अनारक्षित यात्री सफर करते हैं। - बुंदेलखंड के अधिकांश मजदूर झांसी से सफर करते हैं। - मंडल में आरपीएफ के पास 750 व जीआरपी के पास 400 जवान हैं। ये भी उठाए जाएंगे कदम -------------------- - जीआरपी पुल रहेगा बंद, मुख्य द्वार से ही होगा प्रवेश व निकास - परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे दो, तीन और चार पहिया वाहन - ट्रेनों से आने वाले यात्री बीच वाले पुल से होकर मुख्य पोर्टिको (प्रवेश द्वार) से बाहर निकलेंगे। - यात्री स्क्रीनिंग कराने व मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद प्लेटफार्म पर जाएंगे। - एक से दूसरे प्लेटफार्मों पर जाना है तो वे एस्केलेटर पुल का उपयोग करेंगे। - बुकिंग हॉल में सिर्फ यात्री जनरल टिकट लेने जा सकेंगे। - मुख्य पोर्टिको के बीच रस्सी बांधकर डिवाइडर बनाया जाएगा। - प्लेटफार्म पर अनाधिकृत व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए टीमें बनेंगी। - सभी जगह आने- जाने के प्रतीक चिह्न लगाएं जाएंगे। - सभी को अपने वाहन रेलवे परिसर के बाहर ही खड़े करने होंगे।