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रेलवे ने खामोशी के साथ किया ट्रेन का सफर महंगा

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झांसी। कोरोना महामारी के बीच रेलवे यात्रियों पर किराया बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ डालता जा रहा है। त्योहार स्पेशल ट्रेनों में सफर करने वालों से किलोमीटर रेस्ट्रिक्शन चार्ज (निर्धारित दूरी) की वसूली होने लगी है। इन ट्रेनों में पांच सौ किलोमीटर तक का किराया अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि, स्पेशल ट्रेनों में पूर्व से ही सुपरफास्ट का अतिरिक्त चार्ज लिया जा रहा है। ऐसा कर रेलवे अपने घाटे की भरपाई में लगा है।
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कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से नियमित ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद 12 मई से 14 जोड़ी राजधानी एक्सप्रेस व एक जून से 200 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को स्पेशल बनाकर चलाया गया। जैसे- जैसे ट्रैफिक बढ़ रहा है। रेलवे स्पेशल ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाता जा रहा है। इन ट्रेनों में सिर्फ कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही सफर करने की अनुमति दी जा रही है। रेलवे शुरू से ही स्पेशल ट्रेनों में सुपरफास्ट के नाम अतिरिक्त किराया वसूल कर रहा है। मगर, अब किराया भी धीरे- धीरे बढ़ता जा रहा है। अब रेस्ट्रिक्शन चार्ज के नाम पर वसूली होने लगी है। इसमें आप किसी भी स्टेशन पर उतरे। कम से कम 500 किलोमीटर का किराया देना ही होगा। त्योहार स्पेशल ट्रेनों में अभी यह अतिरिक्त किराया लिया जा रहा है। जैसे कि ग्वालियर बरौनी मेल को नए नंबर 04185/ 04186 त्योहार स्पेशल ट्रेन बनाकर चलाया जा रहा है। इस ट्रेन में अगर आप झांसी से उरई, कानपुर या लखनऊ के लिए स्लीपर क्लास में सफर कर रहे हैं तो आपको पांच सौ किलोमीटर के हिसाब से 385 रुपये किराया देना होगा। जबकि झांसी से उरई की 102, कानपुर की 220 व लखनऊ की दूरी 293 किलोमीटर है। झांसी से अभी 70 ट्रेनें अप और डाउन की गुजर रहीं हैं, जिनमें 20 त्योहार स्पेशल गाड़ियां हैं।
- त्योहार स्पेशल ट्रेनों में ही यह अतिरिक्त किराया लग रहा है। जबकि स्पेशल ट्रेनों में सुपरफास्ट का चार्ज लिया जा रहा है। रेलवे बोर्ड स्तर पर किराए का निर्धारण होता है। मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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