झांसी। रेलवे के झांसी मंडल में कोरोना काल में शुरू किया गया वर्क फ्रॉम होम कर्मचारियों के लिए घर बैठे वेतन लेने का जरिया बन गया है। मंडल के तमाम कर्मचारी ऐसे हैं, जोकि अब तक घर बैठे वेतन ले रहे हैं। रेलवे के पास ऐसे ही तमाम कर्मचारियों की शिकायतें भी पहुंचीं हैं। तमाम कर्मचारी ऐसे हैं, जो रेलवे के साथ अन्य व्यावसायिक कार्य भी कर रहे हैं। ट्रैक डिपो के पीडब्ल्यूआई का मामला सामने के आने के बाद रेलवे में हड़कंप मचा हुआ है। उच्चाधिकारी अगर ठीक से जांच कराएं, तो बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
झांसी मंडल में करीब 15 हजार रेलवे कर्मचारी हैं। जोकि रेलवे के विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन और संक्रमण बढ़ने पर रेलवे बोर्ड ने 50 फीसदी स्टाफ को कार्यालय बुलाने की व्यवस्था की थी। जबकि अधिकांश कार्यालयों का स्टाफ पूरी तरह से वर्क फ्र ॉम होम पर था। संक्रमण कम होने के साथ कार्यालयों में कर्मचारियों को फिर से बुलाया जाने लगा। मगर अब तक तमाम कर्मचारी ऐसे हैं, जो घर बैठे ही वेतन ले रहे हैं। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी वर्ग में अधिकांश कर्मचारी ऐसे हैं, जो सालों से कार्यालय नहीं आए हैं। मंगलवार को ट्रैक डिपो के पीडब्ल्यूआइ का मामला सामने आया था। वे तीन महीने से कार्यालय आए बिना वेतन ले रहे थे। मंडल अभियंता ट्रैक ने पीडब्ल्यूआइ का तीन महीने का वेतन काट दिया है। इस मामले के बाद तमाम रेल कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। रेलवे के कार्मिक विभाग के पास तमाम कर्मचारियों की ऐसी शिकायतें भी पहुंचीं हैं। अगर अधिकारी ठीक से मामले की जांच करें तो बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
रेलवे के हर विभाग में रजिस्टर के साथ बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था है। हर कर्मचारी का पूरा रिकार्ड रखा जाता है। किसी कर्मचारी के संबंध में ऐसी शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच की जाती है।- मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी मंडल