झांसी। सोमवार को आगरा विजिलेंस की टीम ने झांसी के वाणिज्य कर कार्यालय में कार्यरत डिप्टी कमिश्नर (कर वसूली) के मथुरा व झांसी स्थित घरों में एक साथ छापा मारा। दोनों स्थानों से विजिलेंस टीम आवश्यक दस्तावेज जब्त कर अपने साथ ले गई। टीम ने सामान की सूची, वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी की।
मथुरा में स्थित श्रीजी गार्डन कालोनी निवासी डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल झांसी वाणिज्य कर कार्यालय में डिप्टी कमिश्नर (कर वसूली) के पद पर कार्यरत हैं। वह झांसी में बीकेडी के पास विकास भवन से सटी कालोनी में किराए के मकान में रहते हैं। दो माह पहले मथुरा के थाना हाईवे पर विजिलेंस की ओर से डॉ. एके अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जुटाने का मामला दर्ज किया गया था। सोमवार को उक्त अफसर के खिलाफ ठोस सबूत एकत्रित करने के लिए विजिलेंस टीम आगरा ने मथुरा व झांसी स्थित घर पर एक साथ छापा मारा।
16 सदस्यीय टीम प्रभारी प्रदीप कुमार कौशिक के नेतृत्व में बीकेडी स्थित घर पहुंची। उस समय घर पर ताला लटका हुआ था। इसके बाद टीम ने सीपरी बाजार थाना पुलिस के सामने ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया। इस दौरान टीम के सदस्य कई घंटों तक घर में रखे दस्तावेजों की जांच करते रहे। टीम ने घर में मौजूद सामान की सूची, फोटोग्र्राफी व वीडियोग्राफी भी की। तदुपरांत आवश्यक दस्तावेज जब्त कर टीम वापस लौट गई।
इधर, मथुरा संवाददाता के अनुसार सुबह आठ बजे सर्च वारंट लेकर सीओ विजिलेंस बलधारी सिंह टीम के एक दर्जन सदस्यों, तहसीलदार, मथुरा कोतवाली प्रभारी व एसओ गोविंद नगर, पीएसी लेकर डिप्टी कमिश्नर के श्रीजी गार्डन कालोनी स्थित आवास पर पहुंचे। टीम ने घर में मिली चार गाड़ियों, पांच एसी, बड़ी एलईडी, जेवर सहित, घर में मिले प्रापर्टी व अन्य संपत्तियों से संबंधित कागजात की सूची तैयार की और सभी सामान के फोटो खींचे और वीडियोग्राफी कराई। सुबह आठ से दोपहर बाद तीन बजे तक कार्रवाई चली और इसमें विजिलेंस के इंस्पेक्टर वीरपाल सिरोही, बीडी सारस्वत, पीएस शुक्ला, विवेचक पीके शर्मा आदि शामिल रहे।
इससे पहले भी चर्चा में रह चुके हैं डॉ. अनिल
झांसी। इसके पूर्व वर्ष 2013 में डॉ. एके अग्रवाल झांसी वाणिज्य कर कार्यालय में डिप्टी कमिश्नर (विशेष अनुसंधान शाखा) के पद पर कार्यरत थे। उच्च अधिकारियों से चल रहे विवाद के चलते उन्हें 16 दिसंबर 2013 को निलंबित कर दिया गया था।
झांसी में तैनाती के बाद से निलंबित होने तक उन्होंने सौ से अधिक सर्वे किए थे। इनमें एक सर्वे खाती बाबा पर स्थित मारबल की फर्म का भी शामिल है। इस फर्म का माल सचल दल ने बिना प्रपत्रों के पकड़ा था। उसी दिन इस फर्म का सर्वे भी कराया गया था। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर उच्च अधिकारी संतुष्ट नहीं थे।
उनका मानना था कि रिपोर्ट कम राजस्व की बनाई गई है, जबकि मौके पर माल अधिक मिला था। इसी तरह, दो अन्य मामलों की सर्वे रिपोर्ट पर भी प्रश्न चिह्न लगाए गए थे। उच्च अधिकारी द्वारा जवाब तलब किए जाने पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट को सही ठहराया था, लेकिन उनके जवाब से उच्च अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए थे और इसकी शिकायत कमिश्नर मुख्यालय को भेज दी थी।
एक बार वह एक व्यापारी द्वारा सर्वे के नाम पर दो लाख रुपये की मांग को लेकर भी चर्चा में आए थे। शासन को भेजी गई एक शिकायत में व्यापार मंडल के एक नेता ने कहा था कि इलाइट चौराहा स्थित एक प्रतिष्ठान का सर्वे किया गया था। अधिकारी द्वारा मामले की लीपापोती के लिए दो लाख रुपये लिए गए थे। इस संबंध में उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई तो एक अफसर के चैंबर में व्यापारी को रुपये लौटा दिए गए। हालांकि, इस मामले में एक अधिवक्ता ने सफाई दी थी कि केस खत्म कराने के लिए पैसे उसने लिए थे, अधिकारी से कोई संबंध नहीं है।
इसी तरह विगत तीन जुलाई 2013 की रात दुर्ग से आगरा जा रही दो सफारी गाड़ियों से जब्त की गई तकरीबन 72 लाख रुपये की चांदी मामले में अपने उच्च अधिकारी के खिलाफ शिकायत के बाद भी वह चर्चा में आए थे। उन्होंने शमन शुल्क वसूलने के बाद आनन-फानन में जब्त चांदी छोड़ने के मामले में उन्होंने कथित रूप से इसकी शिकायत मुख्यालय में की थी। इसके बाद से ही दोनों अधिकारियों के बीच दूरियां बननी शुरू हो गईं थी। कई बार तो सार्वजनिक नोकझोंक की स्थिति बनी। दोनों ही अधिकारियों ने इस संबंध में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें मुख्यालय को भेज रखीं थीं।
तीसरी मंजिल पर बनवाया बगीचा
2004-05 में मथुरा में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात रहे डॉ. एके अग्रवाल ने श्रीजी गार्डन में 17 नंबर का 200 गज से अधिक जमीन में बना हुआ मकान खरीदा था। वाणिज्य कर से जुड़े सूत्रों के अनुसार उन्होंने अच्छे खासे बने मकान को धराशायी करवाकर नए व अत्याधुनिक तरीके से डिजाइन कराकर फिर से बनवाया। इसमें तीसरी मंजिल पर आधुनिक बगीचा सजवाया। घर में हर चीज आधुनिक शैली व ब्रांडेड उपकरण लगे हैं।