तीन सौ साल पुराने रघुनाथ राव महल के दिन फिरने की आस जगी है। पुरातत्व विभाग ने इस प्राचीन धरोहर को उसका पुराना स्वरूप लौटाने की तैयारी कर ली है। इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसमें दो करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
झांसी में मराठा राज्य का सूर्यास्त होने के साथ रघुनाथ राव महल वीरान हो गया। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। आजाद हिंदुस्तान में भी ये महल उपेक्षित पड़ा रहा। इसी का नतीजा रहा कि महल के इर्दगिर्द घनी बस्ती बस गई। यहां तक कि महल की जमीन पर भी कब्जे हो गए और एक पूरा का पूरा मुहल्ला बस गया।
हालांकि, दो दशक पहले राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में लिया था, लेकिन ये संरक्षण सिर्फ कागजों में ही सीमित रहा। धरातल पर महल को बचाने के कोई उपाय नहीं किए गए। लगातार उपेक्षित होने की वजह से महल की दीवारें और छत दरकती चलीं गईं। अब अवशेष नाम पर सिर्फ खंडहर ही बाकी हैं। लेकिन, अपनी अद्भुत बनावट की वजह से ये भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
अब जाकर पुरातत्व विभाग ने इस पुरातात्विक धरोहर की सुध ली है। पुरातत्व विभाग ने इसका प्राचीन स्वरूप लौटाने की तैयारी की है। महल का जीर्णोद्धार कर ठीक वैसा ही बनाया जाएगा, जैसा वो तीन सौ साल पहले था। महल के खंडहरों की सहायता से विशेषज्ञ इस काम को अंजाम देंगे। विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार इस काम पर दो करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया। इसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।