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बंदी जेल में करें पढ़ाई, दूर होगी बुराई

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jail - फोटो : demo
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झांसी। पढ़ाई की हसरत रखने वाले बंदियों को अब जेल के अंदर ही शिक्षा मिल सकेगी। बंदी जेल में ही सामान्य विद्यार्थियों की तरह डिप्लोमा धारक और ग्रेजुएट बन सकेंगे। जिला कारागार की पहल पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) जल्द ही कक्षाएं लगाकर पढ़ाई कराने की तैयारी में है। अब तक कुल 112 बंदियों ने अलग अलग संकाय में प्रवेश लिया है। सोच है कि पढ़ाई से बंदियों के अंदर की बुराई दूर होगी। उनका जीवन संवरेगा।
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परिस्थितिवश अथवा अन्य कारणों से जरायम की दुनिया में कदम रखने वाले बंदियों की पढ़ाई की इच्छा को जेल प्रशासन पूरा कराने की तैयारी में है। जेल प्रशासन ने इसके लिए इग्नू से करार किया है। जेल में रहकर बंदी स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। जिन लोगों की पढ़ाई अपराध की दुनिया में आ जाने के कारण बीच में छूट गई थी, उनकी पढ़ाई भी जेल प्रशासन पूरी कराएगा। पढ़ने के लिए किताबें भी मुहैया कराई जाएंगी। जेल में  ऐेसे 112 बंदियों की तलाश की गई है जो प्रबंधक, तकनीकी व पोस्ट ग्रेजुएट तक की शिक्षा हासिल करेंगे। साथ ही, जो पढ़े लिखे बंदी हैं, उनसे कक्षाएं भी चलवाई जाएंगी। इसकेे अलावा, जेल प्रशासन की तरफ से दो शिक्षकों को भी बुलाकर बंदियों की पढ़ाई होगी।
अधूरी शिक्षा को पूरी कराने के लिए भी जेल प्रशासन ने इग्नू से करार कर रखा है। बंदियों से उनकी पढ़ाई करने की इच्छा पूछकर जेल प्रशासन फार्म जमा कराने की व्यवस्था करेगा। इसके लिए उम्र की कोई बाधा नहीं है।
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नि:शुल्क किताबें कराई जाएंगी मुहैया
पढ़ाई की इच्छा रखने वाले कैदियों को जेल प्रशासन और इग्नू मिलकर नि:शुल्क में किताब, कॉपी व अन्य सामग्री उपलब्ध कराएंगे। जेल की पुस्तकालय में सभी तरह की किताबें रखी गई है, ताकि बंदी हर तरह का ज्ञान हासिल कर सकें। इन पुस्तकालयों में मौजूद किताबों से भी उनका ज्ञान बढ़ेगा।

इनमेें मिला प्रवेश
कोर्र्स  - संख्या
बीपीपी         - 58
सीएफएन     -30
सीएचआर     - 06
सीआईजी     - 05
सीडीएम     - 05
बीए प्रथम     - 06
एमएचडी प्रथम - 01
एमएसओ प्रथम - 01

रिहा होने पर जारी रख सकेंगे पढ़ाई
प्रवेश लेने वाले कई बंदी ऐसे भी हैं, जिनकी कुछ समय बाद जमानत होगी। ऐसी में इनकी पढ़ाई में रोड़ा न आए, इसका भी इंतजाम कारागार की तरफ से किया जा रहा है। बंदी के जमानत से रिहा होने के बाद भी वे अपनी पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय अलग से उनकी तैयारी कराएगा।

राजीव शुक्ल
पढ़ाई करने वाले बंदियों की इच्छा पूरी करने के लिए कारागार ने यह कदम उठाया है। पढ़ाई में जेल प्र्रशासन सभी पढ़ने वाले बंदियों की मदद करेगा। 112 कैैदियों के फार्म भरवाकर कक्षाओं में दाखिले ले चुके हैं। जेल में कक्षा लगवाकर उनकी पढ़ाई का इंतजाम कराया जा रहा है।
राजीव शुक्ल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

 मोहम्मद आबिद खान
बंदियों के शिक्षित होने से जेल का माहौल बेहतर होगा। जिला कारागार की मंशा है कि बंदियों को शिक्षित हो, जिससे वह समाज में सम्मान पूर्वक जीवन जी सके। ऐसे बंदियों को किताब, कॉपियां व अन्य उपयोगी वस्तुएं दिलाने का काम उनकी तरफ से किया जाएगा। समय - समय पर मदद भी की जाएगी।
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मोहम्मद आबिद खान, मजिस्ट्रेट/सदस्य, बाल कल्याण समिति
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