झांसी। किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त और ज्ञान का भंडार होती हैं। लेकिन इंटरनेट के इस दौर में किताबें एक कोने में भंडारित हो कर रह गई हैं। उपन्यास, साहित्य प्रेमी लगातार कम होते जा रहे हैं। शहर के पुस्तकालयों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले ही ज्यादा दिख रहे हैं।
पुस्तकालयों में जहां एक ओर पुस्तक प्रेमियों की भरमार रहती थी, आज वही पुस्तकालय खाली पडे़ हैं। किताबों के रैक पर धूल चढ़ने लगी है। हालांकि यह भी सत्य है कि इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री भी इन्हीं किताबों से ही ढूंढकर अपलोड की जाती है। जिले में स्थित राजकीय पुस्तकालय में आज भी कई हजारों किताबें और ग्रंथ संजो कर रखे हुए हैं। यहां तक कि कुछ ग्रंथ और वेद पांडुलिपि में लिखे भी यहां मौजूद हैं।
दूसरी ओर यहां पर पाठकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। अभी तक 1200 सदस्य पुस्तकालय में सदस्यता लिए हुए हैं, जबकि प्रतिदिन सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं के लगभग 30-40 परीक्षार्थी यहां आकर घंटों बैठकर पढ़ते हैं। लेकिन साहित्य प्रेमियों की संख्या लगातार घट रही है। जो सदस्यता लिए हुए भी हैं उनमें भी अधिकांश बुजुर्ग हैं। राजकीय पुस्तकालय में 50 हजार पुस्तकों का संग्रह है ।
शोधार्थियों के लिए अहम है राजकीय संग्रहालय का पुस्तकालय
राजकीय संग्रहालय के पुस्तकालय को संदर्भ पुस्तकालय कहा जाता है। जो शोधार्थियों के लिए खोला जाता है। यहां पुस्तकों के अध्ययन के लिए शोधार्थी को पहले आवेदन करना होता है। संग्रहालय में इस पुस्तकालय को वर्ष 1978 में तैयार किया गया था। यहां 4500 पुस्तकों का संग्रह है, जिनमें देश की पुरातत्व विरासत की बारीकियां उल्लेखित है। यहां कई राज्यों से शोधार्थी आते हैं।